Vigyan par kavita | vigyan ne samay bachaya
कविता-विज्ञान ने समय बचाया विज्ञान ने समय बचाया दबाया बटन काम हो जाए छोड़ पैदल,साइकिल,गाड़ी,हमें आसमान में उड़ना सिखाया यह …
Related Posts
उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा
December 8, 2021
उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज
चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!
December 4, 2021
चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह
ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी
December 3, 2021
ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो
बेमानी- जयश्री बिरमी
December 3, 2021
बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी
“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.
December 3, 2021
“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास
ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!
December 3, 2021
ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

