Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, kishan bhavnani, lekh

Vidhvanshak mahayuddh

विध्वंसक महायुद्ध रूस यूक्रेन युद्ध संभावना से यूरोप सहित विश्व में खलबली- भारत सतर्क – एडवाइजरी जारी महायुद्ध से वैश्विक …


विध्वंसक महायुद्ध

Vidhvanshak mahayuddh
रूस यूक्रेन युद्ध संभावना से यूरोप सहित विश्व में खलबली- भारत सतर्क – एडवाइजरी जारी

महायुद्ध से वैश्विक तबाही रोकने कूटनीतिक, राजनयिक समाधान तक पहुंचने की दिशा में सक्रिय शांति प्रयास तात्कालिक ज़रूरी- एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दो विध्वंसक महायुद्ध मानवीय योनि ने देखे हैं, जिसके भयंकर परिणाम हमने इतिहास में पढ़ते हैं। दूसरी ओर जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम के हम लोगों को भी पीढ़ी दर पीढ़ी भुलाया नहीं जा सकता क्योंकि आज भी उसके दुष्परिणाम मानवीय योनि पर असर कर नकारात्मक प्रभावित करते हैं ऐसा मीडिया के द्वारा बताया जाता है।
साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष की करें तो काफी समय से यूक्रेन और रूस का विवाद हम मीडिया में सुनते आ रहे हैं जो आज विध्वंसक महायुद्ध के कगार पर खड़ा है और युद्ध शुरू होने के कयास लगाए जा रहे हैं।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तो मात्र कुछ घंटों का समय बताया जा रहा है जबकि इस बीच अनेक देश अपने राजनयिकों को वापस बुला रहे हैं और युद्ध को लेकर सतर्क हैं और कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि 16 फरवरी 2022 को युद्ध शुरु हो सकता है क्योंकि विस्तारवादी देश में चल रहे अपने ओलंपिक खेलों की समाप्ति होगी। जबकि 16 फरवरी 2022 को देर रात तक टीवी चैनलों पर दिखाया गया कि कुछ क्षेत्रों से रूस अपने सैन्य साजोसामान वापस ला रहा है जबकि नाटो सहित यूरोपीय देशों ने रूसी सेना की वापसी का दावा खारिज़ किया और कह रहे हैं महज कुछ घंटों में रूस हमला कर सकता है।
साथियों बात अगर हम मौजूदा तनाव की करें तो, मौजूदा तनाव के बीज 1999 में बोए गए थे। 1991 में सोवियत यूनियन के विघटन के बाद नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गनाइजेशन) ने मध्य और पूर्वी यूरोप से नए सदस्यों को संगठन में शामिल करने का फैसला किया। रूस पश्चिमी देशों से गारंटी चाहता है कि नाटो गठबंधन यूक्रेन और अन्य पूर्व सोवियत देशों को सदस्य नहीं बनाएगा, गठबंधन यूक्रेन में हथियारों की तैनाती रोक देगा और पूर्वी यूरोप से अपनी सेना वापस ले लेगा। हालांकि इन मांगों को पश्चिमी देशों ने सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिका और नाटो रूस की मुख्य मांगों पर किसी भी तरह की रियायत को दृढ़ता से खारिज कर चुके हैं। रूस ने इसका जोरदार विरोध किया लेकिन वह अकेला इस विस्तार को रोकने के लिए बहुत कमजोर था। लिहाजा रूस ने आंशिक रूप से समझौता करते हुए 1997 में नाटो के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि ने नाटो के विस्तार को साफतौर पर प्रतिबंधित नहीं किया लेकिन नाटो ने नए सदस्य देशों के क्षेत्र में सैनिकों और परमाणु हथियारों को तैनात नहीं करने पर अपनी सहमति जताई। इसके बाद, नाटो ने वारसॉ संधि के ज्यादातर पूर्व सदस्यों को शामिल करने के लिए पूर्व की ओर विस्तार किया।
साथियों बात अगर हम इस मामले के परिपेक्ष में अमेरिका की करें तो, व्हाइट हाउस की प्रधान उप प्रेस सचिव ने सोमवार को कहा कि अमेरिका संकट को कम करने के लिए एक राजनयिक समाधान तक पहुंचने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा जैसा कि आप सभी जानते हैं, सप्ताहांत में बाइडन ने (रूस के) राष्ट्रपति के साथ बात की और हम अपने सहयोगियों तथा भागीदारों के साथ पूर्ण तालमेल बनाते हुए रूस सरकार के साथ संपर्क में हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति के प्रशासन ने एक बार फिर रूस को यूक्रेन पर आक्रमण करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि क्रेमलिन रचनात्मक तौर पर चयन करता है तो कूटनीति का मार्ग अभी भी उपलब्ध है।
साथियों बात अगर हम इस मामले के परिपेक्ष में भारत की करें तो, रूस और नेटो के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए किसी का पक्ष लेना मुश्किल हो गया है। लिहाजा वह संतुलन बनाने की कोशिश में लगा है। अमेरिका और रूस दोनों भारत के रणनीतिक साझीदार हैं, लेकिन क्या यूक्रेन पर रूस और अमेरिका की अगुआई वाले नाटो के बीच चरम पर पहुंच चुके तनाव को देखते हुए वह राजनयिक बैलेंस बनाने में कामयाब होगा।
दरअसल इस मामले में अमेरिका भारत को अपने पाले में देखना चाहेगा, लेकिन भारत रणनीतिक तौर पर रूस का भी करीबी है। वह लंबे वक्त से रूसी रक्षा उपकरणों और हथियारों का खरीदार रहा है, इसलिए रूस पर उसकी निर्भरता बनी हुई है, इसके साथ ही उसे चीन के आक्रामक रुख का भी सामना करना पड़ता है, इस लिहाज से भी रूस का साथ जरूरी है।
अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश में ही उसने 31 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन तनाव पर चर्चा के लिए होने वाली वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन जब चर्चा हुई तब वहां मौजूद भारत के प्रतिनिधि ने इस तनाव को कम करने और क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की अपील की।रूस-यूक्रेन विवाद के बीच भारत में यूक्रेनके राजदूत ने कहा है कि यूक्रेन एक कठिन परिस्थिति का सामना कर रहा है लेकिन वहां स्थिति गंभीर नहीं है। उन्होंने भारतीय छात्रों को वापस बुलाए जाने के मुद्दे पर कहा है कि जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है, इसके साथ ही उन्होंने भारत के कुछ चैनलों से अपील की है कि वो यूक्रेन-रूस के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें। उन्होंने एक मासिक पत्रिका से एक विषेश बातचीत में भारत सरकार का धन्यवाद भी दिया. उन्होंने कहा, मैं इस तरह का संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं। यूक्रेन में स्थिति कठिन है लेकिन गंभीर नहीं है।
साथियों भारत अगर हम इस विध्वंसक महायुद्ध के भारत सहित वैश्विक स्तरपर असर की करें तो, भारत का यूक्रेन के साथ ठीक-ठाक आपसी व्यापार है। भारत यूक्रेन को दवा और इलेक्ट्रिकल मशीनरी आदि बेचता है तो दूसरी ओर खाने के तेल से लेकर खाद और न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी जरूरी चीजें खरीदता है। जंग शुरू होने पर यह आपसी व्यापार रुक सकता है, जिससे भारत की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
साथियों बात अगर हम रूस पर असर की करें तो रूस को एसडब्लयूआईएफटीफाइनेशियल सिस्टम से बाहर किया जा सकता है।इस सिस्टम से दुनियाभर में एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसों का लेनदेन होता है इससे रूस की अर्थव्यवस्था को तुरंत झटका लगेगा। रूस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पैसों का ट्रांसजेक्शन नहीं कर पाएगा इससे रूस के तेल और गैस से मुनाफे में कमी आ जाएगी रूस के रेवेन्यू का 40 फीसदी तेल और गैस से आता है अमेरिका रूस पर यूएस डॉलर के लेनदेन पर भी रोक लगा सकता है।रूस यूएस डॉलर में भी ट्रांसजैक्शन नहीं कर पाएगा।
साथियों बात अगर हम पूरे यूरोप पर असर की करें तो बड़ा असर यूरोप की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा यूरोप में बिजली महंगी हो जाएगी।यूरोप की 33 फ़ीसदी नेचुरल गैस रूस से आती है। यूक्रेनियन पाइपलाइन के जरिए रूस यूरोप को गैस सप्लाई करता है। जर्मनी में गैस खपत का आधा हिस्सा रूस से आता है युद्ध की वजह से अगर ये सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो बिजली उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। साथ ही कारखानों को भी बंद करना पड़ सकता है।
साथियों बात अगर हम महंगाई पर असर की करें तो सबसे बड़ा असर ये होगा कि महंगाई और बढ़ जाएगी तेल महंगा होग, महंगाई बढ़ेगी ! कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।रूस एक दिन में 1 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करता है,जो दुनियाभर की मांग का करीब 10 फ़ीसदी है।ईंधन की कीमत आसमान छूने लगेंगी दुनिया भर के शेयर मार्केट्स में और ज्यादा गिरावट आएगी।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विध्वंसक महायुद्ध! रूस यूक्रेन युद्ध से यूरोप सहित विश्व में खलबली मची है! भारत सतर्क है तथा एडवाइजरी जारी जारी की है। महायुद्ध से वैश्विक तबाही रोकने कूटनीतिक राजनयिक समाधान तक पहुंचने की दिशा में सक्रिय शांति प्रयास तत्कालिक  ज़रूरी है।

संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता के मूल आधार है हमारे सामाजिक त्यौहार।

March 23, 2023

सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता के मूल आधार है हमारे सामाजिक त्यौहार। हिंदुस्तान त्योहारों का देश है। त्योहार हमको सामाजिक और

मोहि मिलो गुर सतगुरु पूरा

March 22, 2023

मोहि मिलो गुर सतगुरु पूरा अति सुखकारक और दुखहरन है पूरण सतगुरु श्रीदर्शन गोंदिया – सृष्टि की पृथ्वी धरा पर

अंतरराष्ट्रीय झूलेलाल जयंती चेट्रीचंड्र महोत्सव 23 मार्च 2023 पर विशेष

March 22, 2023

अंतरराष्ट्रीय झूलेलाल जयंती चेट्रीचंड्र महोत्सव 23 मार्च 2023 पर विशेष धार्मिक आस्था का प्रतीक – चेट्रीचंड्र पर्व भारत सहित अंतरराष्ट्रीय

फेक न्यूज और दुष्प्रचार भारतीय समाज में नई चुनौतियाँ

March 22, 2023

फेक न्यूज और दुष्प्रचार भारतीय समाज में नई चुनौतियाँ हर किसी की यह जिम्मेदारी है कि वह फेक न्यूज और

मौत का मुल्यांकन | maut ka mulyankan

March 22, 2023

 भावनानी के भाव मौत का मुल्यांकन मैंने भी सोचा हम तो यूं ही जिंदगी  जिए जा रहे हैं बेकार  मौत

अब हमारी आदत ही पानी बचा सकती है।* (22 मार्च जल दिवस विशेष)

March 22, 2023

अब हमारी आदत ही पानी बचा सकती है।(22 मार्च जल दिवस विशेष) जल से जीवन है जुड़ा, बूँद-बूँद में सीखनहीं

PreviousNext

Leave a Comment