Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vichardhara by nandini laheja

विचारधारा अनगिनत विचारों की धारा में, नित बहता जाता यह जीवन है। पल भी यह ना चैन पाता,विचारों में मग्न …


Vichardhara by nandini laheja

विचारधारा

अनगिनत विचारों की धारा में, नित बहता जाता यह जीवन है।

पल भी यह ना चैन पाता,विचारों में मग्न रहता अपना जीवन है।

कभी विचारधारा हमारी, हमें मंजिल तरफ ले जाती है।

दिखलाती सही मार्ग हमें , सफलता भी दिलाती है।

तो कभी कई विचार, मन को व्यथित बड़ा है कर देते।

क्या सही क्या है गलत, चाहकर भी ना समझ पाते।

गर कभी ऐसा, ध्वंद विचारों का, तुझे सताता है।

नयन मूँद, कर ध्यान ईश का, वही सही राह दिखता है।

माना सभी को अपने विचारों को, सम्मुख लाने का अधिकार है।

पर एक होगी विचार धारा, सभी की यह सोचना बेकार है।

पर परिवार, समाज या फिर राष्ट्र हित में,

हर आयु,वर्ग,जाति, की विचार धारा को, मिलना चाहिए उचित सम्मान।

तभी आपसी प्रेम व् सौहार्द बढ़ेगा, ना होगा किसी का अपमान।

नंदिनी लहेजा

रायपुर(छत्तीसगढ़)

स्वरचित मौलिक


Related Posts

माँ

June 24, 2022

 माँ अनिता शर्मा एक शब्द में संसार समाहित, जग जननी है माँ। कितनी भोली, कितनी प्यारी, मुझे प्यारी है माँ

तन्हा सी!!!!

June 24, 2022

 तन्हा सी!!!! अनिता शर्मा भीड़ में तन्हा-तन्हा सी, कुछ सकुचाई कुछ शरमाई। कह न सकी दिल की बातें, मन ही

वर्षा ऋतु !

June 24, 2022

वर्षा ऋतु ! डॉ. माध्वी बोरसे! ढेर सारी खुशियों की बौछार,सभी करते हैं इस ऋतु का इंतजार ,पशु पक्षियों और

खुशनुमा वातावरण बनाएं!

June 24, 2022

 खुशनुमा वातावरण बनाएं! डॉ. माध्वी बोरसे! लाए खुशियों की बहार, चाहे परेशानियां हो हजार, जिंदगी तो है कुछ पलों की,

जरूर लड़े!

June 24, 2022

जरूर लड़े! डॉ. माध्वी बोरसे! लड़ना है तो अपने क्रोध से लड़े,अपने अंदर के अहंकार से लड़े,स्वयं को मजबूत और

पारदर्शी जीवन!

June 24, 2022

पारदर्शी जीवन! डॉ. माध्वी बोरसे! चलो सोचे और बोले एक समान, जिंदगी को बना ले, थोड़ा और आसान,दिल से और

PreviousNext

Leave a Comment