Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Varatika jal rahi by Anita Sharma

 *वर्तिका जल रही* नित वर्तिका है जल रही, रौनक जहां को कर रही। स्वयं को जलाये प्रतिपल दैदीप्यमान जग को …


 *वर्तिका जल रही*

Varatika jal rahi by Anita Sharma

नित वर्तिका है जल रही,

रौनक जहां को कर रही।

स्वयं को जलाये प्रतिपल

दैदीप्यमान जग को कर रही।

स्त्री की गरिमा भी सम है

नित्य भीतर जल रही,

रौशनी परिवार में भर रही।

दग्ध अगाध ज्वाला लिये

शान्ति की मशाल बनी है।

प्रकाश की आभा स्वर्ण सी,

अरुणिमा की आभा भर रही।

अवनी की गति यही,

अनेक आतंक को झेलकर,

अन्न-धान उपहार भेट देती है।

है वर्तिका जल रही,

आशा की किरण भर रही।

दे रही संदेश हमें ,

स्वयं को जलाये जा

कर्म योगी आदित्य सम।

भविष्य को निखारना,

जले ज्यों वर्तिका की तरह

आलौकित करे सारा जहां।।

हे शमा जल स्वयं ही,

रौशन जहां को कर रही।।

——अनिता शर्मा झाँसी

——मौलिक रचना


Related Posts

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष

April 27, 2022

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष एक महान नायक! समानता का अधिकार दिलाया,ज्ञान का प्रकाश चमकाया,किया संघर्ष मानवता के अधिकार

स्वयं को पहचाने!

April 27, 2022

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े

जीवन में द्वंद का समापन!

April 27, 2022

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या

मोहब्बत का मरहम़ लगा

April 27, 2022

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

PreviousNext

Leave a Comment