Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Vandana guru charno me karti by Anita Sharma

 विधा-पद्य वंदना गुरु चरणों में करती वंदना गुरु चरणों में करती नित-नित शीश झुकाती हूँ। हाथ जोड़कर प्रणाम करूँ हृदय …


 विधा-पद्य

वंदना गुरु चरणों में करती

Vandana guru charno me karti by Anita Sharma

वंदना गुरु चरणों में करती

नित-नित शीश झुकाती हूँ।

हाथ जोड़कर प्रणाम करूँ

हृदय से आभार मानती हूँ।

प्रथम गुरु मातृशक्ति को मेरा

जिसने जन्म दिया मुझको।

धन्य मानती पितृ-छाँव को 

जिनने जग का ज्ञान दिया।

मातृ पितृ को वंदन करती 

जिनने कदम बढ़ाना सिखलाया।

जिनने हिम्मत से मुझको

संसार से सामन्जस्य सिखलाया।

हर कदम पर साथ रहे वे

हर कर्म का ज्ञान दिया ।

किस गुरु से दीक्षा लूँ

कौन माँ पिता सा त्यागी ?

सच्चा गुरु बच्चे का कोई है

वो सिर्फ माता-पिता होता।

मैं पूजूं मात-पिता को ही

वही सच्चे गुरु मार्गदर्शक है।।

—–अनिता शर्मा झाँसी

——-मौलिक रचना


Related Posts

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

April 27, 2022

 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी कभी तो मेरी याद

देखो हर शब्द में रब

April 27, 2022

 देखो हर शब्द में रब दिल को जीत लेते शब्द दिल को भेद भी देते शब्द दिल को बहलता मिठास

काट दिए मेरी कलम के पर

April 27, 2022

 काट दिए मेरी कलम के पर तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगीसौलह श्रंगार करके , मैं खुद

मोहब्बत ए परवाना

April 27, 2022

मोहब्बत ए परवाना कहते हैं वो मोहब्बत ए परवाने , इस अंजुमन में रखा क्या हैतेरे हुस्न दीदार के बिना

गम की बदली

April 25, 2022

 ‘गम की बदली’ मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने

कविता -मेरा जीवन सुखी था

April 25, 2022

 कविता -मेरा जीवन सुखी था  मेरा जीवन सुखी था  जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे  मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता

PreviousNext

Leave a Comment