Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Unka aana aur jana by Jitendra Kabir

 उनका आना और जाना उनका आना और जाना मेरी आंखों का टिक जाना बस उन पर, होंठों पर बड़ी सी …


 उनका आना और जाना

Unka aana aur jana by Jitendra Kabir

उनका आना और जाना

मेरी आंखों का टिक जाना

बस उन पर,

होंठों पर बड़ी सी मुस्कान

का आना,

दिल का धड़कना बड़े ही

जोरों से,

खुशबुओं से जैसे फिज़ा का

महक जाना,

कुछ आनंददायक लक्षण हैं

मेरे महबूब के मुझे सामने 

दिख जाने के।

बेचैनी में छटपटाना दिल का

मेरे पल – पल,

कातर निगाहों से न जाने की

गुहार लगाना,

एक मिनट में दस बार देखना

घड़ी को कभी

और कभी फीकी सी हंसी से

अपने दिल की हालत छुपाना,

कुछ कष्टदायक लक्षण हैं

मेरे महबूब के मेरे पास से

चले जाने के।

                    जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment