Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Umra bhar rotiyan seki by Vijay lakshmi Pandey

 उम्र  भर  रोटियाँ सेंकी…!!! उम्र  भर  रोटियाँ  सेंकी  हमनें , हाथ  जले  तो  असावधानी  हमारी  है। लॉट के  लॉट  बर्तन  …


 उम्र  भर  रोटियाँ सेंकी…!!!

Umra bhar rotiyan seki by Vijay lakshmi Pandey

उम्र  भर  रोटियाँ  सेंकी  हमनें ,

हाथ  जले  तो  असावधानी  हमारी  है।

लॉट के  लॉट  बर्तन  धोये  हमनें ,

तुमनें अपनें  प्लेट धोये तो मेहरबानीं तुम्हारी है।

घर बाहर में  सामंजस्य  बनाया हमनें,

औलादें  बिगड़ीं तो जिम्मेदारी  हमारी  है ।

रिश्तों  को खूबसूरती से  नवाज़ा  हमनें ,

तारीफ़   हुई   तो    हिस्सेदारी  तुम्हारी  है ।

श्रृंगार भी तुम्हारा और शौक भी तुम्हारी,

रहा   या   गया   ये    किस्मत    हमारी   है।

हरण  हो  या अपहरण या जुए  का खेल,

बैठे   दाव    खेले    ये  दावेदारी  तुम्हारी है ।

एक  उम्मीद से सुनते  आए  तुमको ,

मुश्किल में खड़े मिलोगे इतनी सी आवाज हमारी है ।

इस “विजय” की आवाज क्षितिज के पार तक जानी चाहिए,

सही मायने में ये  कारीगरी  तुम्हारी  है ।

बेटी बहनों के आँखों में दर्द बहुत है ,

मेकअप  से  छुपते  है  ये हौसले  हमारे  हैं ।

क्या बदला हैअब तक पोस्टर के सिवा…?

कुछ नहीं   हो   सकता  ख़ौफ़   तुम्हारे   हैं …!!!

कुछ बदलना चाहते हो तो सोच बदलो,

मजाक बनता है तो रूह काँप जाती है ये जज्बात हमारे  है।

भरी महफ़िल में खैर पूछ लेते है तुम्हारी,

हम तेरे लोगों में खड़े  हो जाये तो धज्जियां उड़ाई है।

तुम्हारे लिए रोज पकवान बनाये हमनें,

बुख़ार आने पर तुमनें बनाये तो परेशानी तुम्हारी है।

उम्र  भर  रोटियाँ  सेंकी  हमनें ।

हाथ  जले  तो  असावधानी  हमारी  है ।।

               विजय लक्ष्मी पाण्डेय
               एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
               स्वरचित आत्ममंथन
                      आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

Leave a Comment