Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

tyauhaaron ke bahane by jitendra kabir

 त्यौहारों के बहाने त्यौहारों के बहाने  घर लौट पाते हैं… रोजी – रोटी के खातिर  अपने घरों से दूर रहने …


 त्यौहारों के बहाने

tyauhaaron ke bahane by jitendra kabir

त्यौहारों के बहाने 

घर लौट पाते हैं…

रोजी – रोटी के खातिर 

अपने घरों से दूर रहने को मजबूर लोग,

पढ़ाई – लिखाई के खातिर

अपने माता – पिता के सानिध्य से दूर युवा,

मायके में अपने प्रियजनों के साथ

थोड़ा समय बिताने की चाह रखने वाली

विवाहिताएं,

त्यौहारों के बहाने 

एक – दूसरे के साथ खड़े हो पाते हैं…

कई छोटे – बड़े मुद्दों पर मन ही मन

अलगाव की हद तक पहुंच चुके 

कुछ भाई, बिरादर और रिश्तेदार,

अब एक – दूसरे की संगत से

परहेज करने वाले

बचपन के लंगोटिया यार,

इस देश के ज्यादातर लोगों के लिए

त्यौहारों का धार्मिक संदर्भ प्रतीकात्मक है,

असली खुशी अपनों से मिलकर 

कुछ समय बिताने की है।

            जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Shrad ka bhojan by Sudhir Srivastava

September 22, 2021

 श्राद्ध का भोजन कौआ बनकर मैं तुम्हारे घर की मुँडेर पर नहीं आऊँगा, अपने और पुरखों का सिर मैं झुकाने

Rang kavita by nandini laheja

September 18, 2021

 रंग ये ज़िन्दगी भी देखो,बड़ी अजीब सी है। अलग-अलग रंगो, से ये सजी हुई है। कुछ रंग है खुशियों के,

Balkavita chidiya by mainudeen kohri

September 18, 2021

 बाल कविता चिड़िया        चूं – चूं चीं – चीं करती चिड़िया । सब  के मन को भाती चिड़िया

Balkavita television by mainudeen kohri

September 18, 2021

बाल कविता टेलीविजन   मैं  हूँ बच्चों   टेलीविजन । मेरा कोई  नहीं है सीजन ।। मैं चलता रहता हरदम ।

Khuda bhi aajkal khud me he pareshan hoga

September 18, 2021

खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा ऊपर से जब कभी

Bal kavita raat by mainudeen kohri

September 18, 2021

बाल कविता रात रात हुई भई रात हुई । दिन हो गया ज्यूँ छुई मुई ।। रात हुई अंधेरा साथ लाई

Leave a Comment