Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Tute huye risto ka ahsas by km.soni muskan

 टूटे हुए रिश्तों का एहसास कुछ टूटे हुए रिश्तों की भी हमेशा याद आती है रिश्ते तो खत्म हो चुके …


 टूटे हुए रिश्तों का एहसास

Tute huye risto ka ahsas by km.soni muskan

कुछ टूटे हुए रिश्तों की भी हमेशा याद आती है

रिश्ते तो खत्म हो चुके हैं लेकिन तुम उसे संभालते क्यों हो

जब मुझसे इतना ही नफरत थी  तुझे 

तो इतने करीब आकर सताते क्यों हो

और जब दूर चले ही गए हो तुम तो दूर ही रहो न

कभी कभी पास आकर मुझे तड़पाते क्यों हो

तुम अगर अच्छे हो तो अच्छे ही बने रहो न

अपनी अच्छाई पर इतना इठलाते क्यों हो

मैं अगर बुरी हूं तो मुझे बुरी रहने दो न

खुद को अच्छा दिखाने के लिए मेरी बुराई करते क्यों हो

एक घाव पुराना भरा नहीं कि एक दर्द और भी दे दिए

एक वक्त एसा भी होता था जो तुम सिर्फ मुझपे ही मरते थे

और मेरी हर खुशी के खातिर बेमतलब सबसे लड़ते क्यों थे

हां ये सच है कि तुम्हारे दिए हुए दर्द के कारण मेरे आंखो से आंसू निकल आते हैं

झुक जाती हूं मैं भी किसी ख़ास के सामने

क्योंकि मुझे भी तो अपने रिस्पेक्ट से प्यार है न

हम तो मुस्कुराकर दर्द छुपा लेते है और लोग हम जैसे बनने की दुआ मांगते क्यों है

मैं अगर बार बार तुम्हें रिस्पेक्ट देती हूं तो क्या तुम्हारा

फर्ज नहीं कि तुम भी रिस्पेक्ट करो

अगर तुम्हें रिश्ता नहीं रखना मुझसे तो कह दो न प्यार से

मुझे इतना सताने की जरूरत क्या है हम खुद ही चले जायेंगे तुम्हारी जिंदगी से

हर वक्त, हर पल, हर किसी के सामने मुझे अपने से नीचा दिखाते क्यों हो

एक बात पूछूं, क्या कमी रखी थी मै तुमसे रिश्ते निभाने में

कि तुम थोड़ा भी हिचके नहीं मुझसे दूर जाने में

पर सच बताएं तुम्हें भुलाना मुश्किल तो है पर दूर जाने से सुकून भी बहुत मिला 

अच्छा है कि तुम हमसे दूर ही रहो न पास आकर हमें

इतना रुलाते क्यों हो….।

               

                कु. सोनी भारती


Related Posts

कविता – न मिला

September 1, 2022

कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती

कविता – बे-परवाह जमाना

September 1, 2022

कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है

कविता – नयन

September 1, 2022

कविता – नयन दोनों नयन सावन बनकररिमझिम – रिमझिम बरसात करेंसमझ तनिक आता ही नहींके कितने हैं जज़्बात भरे मौन

कविता -शहर चलाता है

September 1, 2022

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

PreviousNext

Leave a Comment