Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

tum mere ho kavita by Anita Sharma jhasi

 तुम मेरे हो कहाँ खो गये गिरधारी। मोर मुकुट,बंसीवाले। ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे, पर….तुम मेरे हो गिरधारी। कब से बाँट …


 तुम मेरे हो

tum mere ho kavita  by Anita Sharma jhasi

कहाँ खो गये गिरधारी।

मोर मुकुट,बंसीवाले।

ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे,

पर….तुम मेरे हो गिरधारी।

कब से बाँट निहार रही हूँ,

ओ राधा के दिल की धड़कन।

मोर मुकुट नटखट मोहन ,

माँ जसोदा के प्यारे।

मीरा पुजारिन तेरी मोहन,

लोक लाज तज शरण तिहारे आई।

पर तुम बस मेरे हो ।

मैं भक्त अदना सी हूँ मोहन,।

पर तुम मेरे प्यारे मोहन।

बहुत अवगुण भरे हैं 

मुझमें,

तुम स्वीकारो मेरे प्यारे गिरधारी।

**

तुम मेरे हो,मैं तुम्हारी,

—अनिता शर्मा झाँसी

—-मौलिक रचना

 


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment