Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Tum ho meri mohabat rahogi meri

Tum ho meri mohabat rahogi meri बारिशों के बूँद सा टपकता रहातुम भी रोती रही मैं भी रोता रहाप्यार तुझको …


Tum ho meri mohabat rahogi meri

Tum ho meri mohabat rahogi meri
बारिशों के बूँद सा टपकता रहा
तुम भी रोती रही मैं भी रोता रहा
प्यार तुझको मैंने किया है सनम
भूल जाने की आदत नहीं है मेरी
तेरे मजबूरियों ने सितम कर दिया
दर्द में तुम रही दर्द में मैं रहा

तुम हो मेरी मोहब्बत रहोगी मेरी
देख के, नजरें ना , चुराना सनम
हूँ अकेला जीवन के मेले में
राह में जैसे राही भटकता रहा

प्यार तुझको मैंने किया है सनम
रात की चाँदनी दिन में ढलती रही
मैं भी रोता रहा तुम भी रोती रही
दर्द में मैं रहा दर्द में तुम रही
बारिशों के

कुछ भी हो जाए मैं हूँ तुम्हारी प्रिये
ज़िन्दगी के मेरे सांसों में तुम
मेरे रग रग में रागों में गीतों में तुम
रात रानी हूँ मैं दिन के सूरज हो तुम

जो जलाए थे तुम प्यार के ज्योती को
दे रही रोशनी मेरे तन मन को
चाह कर भी तुम्हारी नहीं मैं रही
तुम अधूरे रहे मैं अधूरी रही

तेरे मजबूरियों ने सितम कर दिया
दर्द में तुम रही दर्द में मैं रहा
बारिशों के बूँद सा टपकता रहा
तुम भी रोती रही मैं भी रोता रह

दर्द में तुम रही दर्द में मैं रहा
मैं अधूरी रही तुम अधूरे रहे
मैं भी रोता रहा तुम रोती रही
दर्द में मैं रही दर्द में तुम रहे

कवि सी.पी. गौतम


Related Posts

गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव

November 22, 2021

 गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन  तलवंडी,

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी

बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर  इतिहास के साथ छेड़खानी

Swapn ujle hai by siddharth gorakhpuri

November 17, 2021

स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने

Manzil by Indu kumari

November 17, 2021

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

November 17, 2021

 पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा

Leave a Comment