Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Thor Kavita by R.S. meena

ठोर बेटियों पर अत्याचार, चारों तरफ हैं फैलें ठोर । जाहिलों को विद्वान, तो विद्वानों को समझे ठोर ।। रक्षा …


ठोर

Thor Kavita by R.S. meena

बेटियों पर अत्याचार, चारों तरफ हैं फैलें ठोर ।

जाहिलों को विद्वान, तो विद्वानों को समझे ठोर ।।

रक्षा को जन रखे हथियार, तो पंछी रखते ठोर ।

कोई तरसे नींद रातभर,और कोई करते ठोर ।।

जुल्म हो रहा चारों और, इंसां को हैं समझे ठोर ।

किसी को मिलती सूखी रोटी,किसी को मिलते ठौर ।।

किसी को मिले ना रैन बसेरा, किसी को मिलता ठौर ।

किसी को मिले पारितोषिक,ना बेगानों को मिलता ठौर ।।

कोई सहारा लेता झुठ का, “स्वरूप” रहे हैं सच की ठौर ।

देशवासियों जाग उठो,वरना नहीं बचेगी अपनी ठौर ।।

ठोर = हैवान ,ग्वार,चोंच,खर्राटे,जानवर

ठौर = मीठा पकवान,महल,अवसर,साथ,जगह

     ==== R.S.meena Indian✍️ ====


Related Posts

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

श्रद्धांजलि-नंदिनी लहेजा

December 10, 2021

श्रद्धांजलि नम हैं हिंदुस्तान आज , जो खोया वीर सपूत।जीवन साथी संग उनके,जाबांज़ वीर भी, क्षति हुई अभूत।इक ज़लज़ला आया

अपना एक घर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

अपना एक घर बहुत आलीशान न भी हो,मामूली-सी छत के नीचे होचाहे साधारण सा एक कमरा,घांस-फूस से बनी झोंपड़ी होअथवा

Leave a Comment