Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Thekedaro ka vikash by Jitendra Kabir

 ठेकेदारों का विकास छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर करता है प्रचार और समर्थन ‘दल विशेष’ का, बदले में पाता है …


 ठेकेदारों का विकास

Thekedaro ka vikash by Jitendra Kabir

छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर

करता है प्रचार और समर्थन

‘दल विशेष’ का,

बदले में पाता है छोटे-मोटे काम,

छोटे स्तर के विभागीय अधिकारियों को

खिला-पिलाकर बचा लेता है ठीक ठीक पैसा,

ईमानदारी और विकास जैसी बातें उसकी

प्राथमिकता में नहीं,

दल विशेष की सरकार रहते 

ज्यादा से ज्यादा पैसा कमा लेना

एकमात्र उद्देश्य है उसका।

बड़ा ठेकेदार तहसील व जिला स्तर पर

करता है प्रचार और समर्थन

‘दल विशेष’ का,

चुनावी चन्दा भी देता है,

बदले में पाता है बड़े-बड़े ठेके,

विभाग के बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को

खिला-पिलाकर  कमाता है मोटा पैसा,

विकास और राष्ट्रनिर्माण जैसी बातों से इनका आशय

सिर्फ अपना विकास और सम्पत्ति निर्माण होता है।

राजनीतिक दलों से नजदीकी के कारण

ऐसे बहुत से ठेकेदार बन जाते हैं जनप्रतिनिधि भी,

जिनसे ‘ जनसेवा ‘ और ‘ विकास ‘ की उम्मीदें

लगाकर ठगी जाती है जनता बहुत बार।

                                                 जितेन्द्र ‘कबीर’

                                                 

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

May 24, 2022

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की

परम शक्ति!

May 17, 2022

परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने वाला वह,वही चला

सुरम्य एवं सहज जीवन!

May 17, 2022

सुरम्य एवं सहज जीवन! गुरुर में रास्ते धुंधले पड़ जाएंगे,खुद के अलावा किसी को कैसे देख पाएंगे,प्रेम और जुनून के

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

May 17, 2022

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

PreviousNext

Leave a Comment