Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Teer nadi ka By H.K Mishra

 तीर नदी का तीर नदी का दूर किनारा , कहां नहीं तुझको ढूंढा है, रात अंधेरी नदी उफनती, मिलन अंत …


 तीर नदी का

Teer nadi ka By H.K Mishra

तीर नदी का दूर किनारा ,

कहां नहीं तुझको ढूंढा है,

रात अंधेरी नदी उफनती,

मिलन अंत वही किनारा  ।।

मौन हमारा मौन से बढ़कर,

कहीं नहीं संदेश  किसी का,

आओ मिलकर मौन रहें,

मौन साधना जीवन की   ।।

मौन गई तू छोड़ मुझे ,

अफसोस मुझे है इसका,

डूब गया कूल किनारा,

तट पर रहा अकेला   ।।

आना-जाना दर्द भरा है,

नियति का सत्य यहीं है ,

जाने अनजाने पथ पर,

चलना कितना और बचा  ।।

अरे समर्पण जीवन का,

बची जिंदगी कितनी है,

मैं भी इतना उलझा हूं ,

सुलझाने को बैठा हूं  ।।

छंद लोरियां लिखने का,

मिला बहाना अपना है,

रोने को दर्द मिला है ,

मेरा साथी चला गया।  ।।

मित्र मंडली कहते हैं,

जाना मेरा निश्चय है ,

दर्द छोड़ जो गई यहां,

ढोना उसका बाकी है ।।

जैसा बोया काटना मुझको,

निश्चय यह करना होगा ,

मीठे का फल मीठा होता,

कड़वा से डर लगता है   ।।

विश्वास से बढ़ता रहा है ,

आत्मविश्वास हरक्षण हमारा,

वेदना के हर घड़ी में ,

मिलता रहा तेरा सहारा  ।।

सुख और संतोष से,

मिलता रहा पूर्ण जीवन,

मैं कहां हूं तू कहां है  ?

यही है अपूर्ण जीवन   ।।

तीर नदी का अदृश्य किनारा,

कितना धुंधला सा दिखता है,

मिलन अंत है मौन प्रेम का ,

यह मुझ को स्वीकार नहीं है  ।।

मौलिक रचना

                    डॉ हरे कृष्ण मिश्र

                     बोकारो स्टील सिटी

                      झारखंड ।


Related Posts

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

कोशिश-नंदिनी लहेजा

January 6, 2022

विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और

Leave a Comment