Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Talash kavita by Kalpana kumari Patna

 स्वरचित कविता तलाश ——– जाने कैसी डोर बंधी है, चाहूं भी तो छोड़ सकूं ना, मेरे हृदय के तार हो …


 स्वरचित कविता

Talash kavita by Kalpana kumari Patna

तलाश

——–
जाने कैसी डोर बंधी है,
चाहूं भी तो छोड़ सकूं ना,
मेरे हृदय के तार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

तन में ढूँढा मन में ढूँढा,
इस मायावी नगरी मे ढूँढा,
सबके अपार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

निज में ढूँढा, पर में ढूँढा,
प्रकृति के कण कण में ढूँढा,
सबके आधार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

जिद हो या हो पूर्ण समर्पण,
या हो मेरे जीवन के दर्पण,
अनंत प्रेम का द्वार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

आज में हो, कल में नहीं,
बीते पल में भी तो नहीं,
ऐसा प्रतिपल आभास हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

दृष्टि भी तुम, सृष्टि भी तुम,
दृष्टि बिन सृष्टि कहाँ है,
ऐसी दृष्टि मिल जाए तो,
अपलक निहार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

बढ़ रही है प्यास निरंतर,
तुझे पाने की चाह निरंतर,
चाहत के गहरे तल पर,
एक सुखद एहसास हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

प्राणों में स्पंदन तेरा,
हर धड़कन पर दस्तक तेरा,
स्वास-स्वास की गहरी पुकार हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

गुनगुनी धूप का एहसास हो तुम,
शीतल पवन का साज भी तुम,
मानो हर पल  पास हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम।

हर जीवन का सार हो तुम,
अंत का पूर्ण विराम हो तुम,
जीवन के हर प्रश्नों का,
एकमात्र जवाब हो तुम,
जाने कैसी तलाश हो तुम…।

— कल्पना कुमारी


Related Posts

Kaikeyi ke ram by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 कैकेयी के राम कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को

Kab tak madhusudan duadenge by vijay Lakshmi Pandey

September 4, 2021

 कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!! कब तक   मधुसूदन दौड़ेंगे । द्रुपद सुता की लाज बचानें।। दरबार सजा  जब  कौरव का ।

Moolbhoot samasyaye vhi hai by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 मूलभूत समस्याएं वही हैं एक वक्त का खाना  जैसे तैसे जुटाकर  दूसरे वक्त की चिंता जिस इंसान के दिमाग में

Rishto ka mahatva by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 रिश्ता की दूरियां-नजदीकियां रिश्तों का महत्व  लंबी दूरियों से नहीं मन की दूरियों से होता है, अन्यथा माँ बाप और 

Teer nadi ka By H.K Mishra

September 4, 2021

 तीर नदी का तीर नदी का दूर किनारा , कहां नहीं तुझको ढूंढा है, रात अंधेरी नदी उफनती, मिलन अंत

Jhoothon ka hai jamana by Jitendra Kabir

August 29, 2021

 झूठों का है जमाना एक बार झूठ बोल कर उसे छुपाने के लिए झूठ पर झूठ बोलते जाना, पकड़े भी

Leave a Comment