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swapn kavita by Arun kumar shukla

शीर्षक-स्वप्न लोग कहते जिंदगी का है सफर छोटा,जानकर के भी मगर मैं भूल जाता हूं।जिस समय मैं सोचता बेचैन रहता …


शीर्षक-स्वप्न

swapn kavita by Arun kumar shukla

लोग कहते जिंदगी का है सफर छोटा,
जानकर के भी मगर मैं भूल जाता हूं।
जिस समय मैं सोचता बेचैन रहता फिर,
स्वप्न के झूलों में फिर से झूल जाता हूं।।

जानते हैं लोग किन्तू करते न ऐसा,
मोह के बातों को मन पे थोप देते हैं।
अटलता को वे सदा ठुकराते ही रहते,
सत्य में संदेह पौधा रोप देते हैं-२।।…

है सही ये बात किन्तू सत्य ये प्यारे,
जिंदगी की राह केवल सत्य ही तो है।
स्वप्न के बल पर यहां मुर्दा भी जीता है,
स्वप्न न हो तो ओ हिम्मत दफ्न ही तो है।।

हर छला,टूटा,थका,इस स्वप्न पर जीता,
आज न तो कल मुझे मंजिल मिलेगा ही।
प्रेमिका हो या पिता ये सोचते इक सा,
प्राणप्रिया का भी कभी अंजलि मिलेगा ही।।

स्वप्न है बलवान इससे सम्हलना हर पल,
टाल दें मृत्यू को जो इसने कहीं ठाना।
जो सनातन धर्म ओ ही धर्मता करना,
स्वप्न खातिर स्वप्न पर पर तुम चले जाना-२।।………..
लेखक-अरुण कुमार शुक्ल


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