Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Suvidha by Jitendra Kabir

 सुविधा सुनो स्त्री! जिनके लिए सुविधा  हो तुम… पूरे परिवार को खाना पकाने व खिलाने की, घर के अंदर-बाहर साफ-सफाई …


 सुविधा

Suvidha by Jitendra Kabir

सुनो स्त्री!

जिनके लिए सुविधा  हो तुम…

पूरे परिवार को

खाना पकाने व खिलाने की,

घर के अंदर-बाहर साफ-सफाई

और बाहर

पशुओं के लिए चारे-पानी का

नित्य इंतजाम करते जाने की,

फसलों के लिए दिन-रात

बिना थके खटते जाने की,

आस-पड़ोस और रिश्तेदारी में

भाईचारा निभाने की,

बच्चों को नहलाने- धुलाने,

स्कूल छोड़ने-लाने से लेकर

पढ़ाने-लिखाने की,

 उनसे अगर तुम्हें उम्मीद है

 बाहरी किसी नौकरी के लिए

 समर्थन की,

 तो बहुत संभव है कि करना पड़े तुम्हें

 निराशा का सामना कई बार,

 

वो क्या है कि 

सुविधा का मोह छोड़ना 

किसी भी इंसान के लिए 

होता है मुश्किल,

इस बात को समझ लो 

तुम जितना जल्दी,

उतनी ही आसानी होगी तुम्हें

अपने लिए निर्णय कोई लेने की।

                        जितेन्द्र ‘कबीर’
                        
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

August 11, 2023

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं,

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई

August 11, 2023

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई दर्द-ए चीख मेरी, मेरे ही भीतर तोड़ मुझे घुटके रह गईनकाब हंसी

Munshi premchandra par kavita |प्रेमचंद

July 31, 2023

प्रेमचंद Munshi premchandra एक ख़्वाहिश है, कि कभी जो तुम एक दोस्त बनकर मिलो,तो कुल्हड़ में चाय लेकर,तुम्हारे साथ सुबह

सात सुरों से भर दो | saat suron se bhar do kavita

July 28, 2023

सात सुरों से भर दो सात सुरों से भर दो बेरंग सी हुई मेरी दर्द-ए जिंदगी में, रंग भर दो

नव वसंत | Nav basant by priti Chaudhary

July 24, 2023

नव वसंत नव वसंत तुम लेकर आना, पतझर सा है यह जीवन। सूख चुकी है सब शाखाएँ, झरते नित ही

कविता -जीभ|ज़बान | kavita :jeebh | jaban

July 21, 2023

कविता -जीभ|ज़बान | kavita:jeebh | jaban आवाज़ की तेरे मैं साथी,स्वाद से कराती तेरी पहचान।चाहे हो भोजन या फिर रिश्ते,मेरा

PreviousNext

Leave a Comment