Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Raunak_Agrawal

Sundar bachpan Raunak Agrawal

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे …


सुंदर बचपन !!

Sundar bachpan Raunak Agrawal
सोनी सी मुस्कान है वो,

हर माँ की जान है वो !!
ये बच्चे मन के सच्चे,
थोड़े कच्चे ,थोड़े पक्के !!

जब कभी रोने लगे, तो ये ममता इन्हें बहलाती है..
फिर प्यारी सी लोरी, और मीठी नींद आ जाती है !!

इस गोद में खेलते-खेलते, हमने बहुत कुछ सिखा,
गरीबो का दुख, और अमीरो का सुख देखा !
कभी ये सोचता था, ऐसा क्यों है हमारा जहां,
किसी को अच्छाई , तो किसी को बुराई की ओर फेका !!

संस्कारों की राह पर हमने चलना सिखा,
जीवन की सच्चाईयों को परखना सिखा ,
बिना झूठ के सहारा लिए,
अपनी बातें पर अड़ना सिखा।

यू तो सब कहते थे, मस्ती करो ,
बैर दूर कर, दोस्ती करना सिखा।
लडते, झगड़ते और कंचे गोली खेलते हुए बचपन निकल गया।
देर से ही सही, पर सही रास्ता मिल गया।
अब जा कर जीवन की अर्थ समझ में आई,
और मन में, कुछ करने की याद आई..!!

अब हम बड़े हो गए, कंधो पर जिम्मेदारी आई..
मन में तो ठानी ही थी, पर अब करने की बात आई !
यू तो सोच कभी घबरा जाता था ,
पर वो हाथ सर पर पढ़ते ही, मैं सो जाता था..!!

गुजर गए वो दिन, जब हम बच्चे थे,
थोड़े कच्चे, थोड़े पक्के थे।
याद आती है वो यारी हमें ,
कंचे ,गोली की कसम!
अगर ले चले, कोई अब भी हमें,
हम चलेंगे उसके संग…!!!

तो बच्चे सिखा जो आपने, अपने बचपन में,
करो जरा उस पर ध्यान !
एक जिम्मेदार नागरिक की मिसाल बनो तुम,
करके अच्छे काम…!!!

-रौनक अग्रवाल


Related Posts

प्रसन्न मन!

June 24, 2022

प्रसन्न मन! डॉ. माध्वी बोरसे! जब मन होता है प्रसन्न,रोकने को चाहता है वह क्षण,चलता वक्त थम जाए,कई और हम

कर्म से लिखे आत्मकथा!

June 24, 2022

कर्म से लिखे आत्मकथा! माध्वी बोरसे! लिखें हमारे जीवन की कहानी,साहस,दृढ़ता हो इसकी निशानी,कलम से नहीं कर्म से लिखें,हमारा जीवनी

खान-पान पर भी तकरार

June 24, 2022

 खान-पान पर भी तकरार जितेन्द्र ‘कबीर’ एक घर की चार संतानें… खान-पान में चारों के हैं अलग विचार, शाकाहारी है

चुनाव के पहले और बाद में

June 24, 2022

 चुनाव के पहले और बाद में जितेन्द्र ‘कबीर’ जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की 

विज्ञापन-मय भारत

June 24, 2022

 विज्ञापन-मय भारत जितेन्द्र ‘कबीर’ सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने एवं छत्तीस प्रकार के टेस्ट करवाने

सभ्यता का कलंक

June 24, 2022

 सभ्यता का कलंक जितेन्द्र ‘कबीर’ बंदरों के झुंड का सरदार अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर संसर्ग करता है अपने

PreviousNext

Leave a Comment