Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sukhi sansar by Sudhir Srivastava

 सुखी संसार किसी का कभी भी सुखी संसार नहीं होता, क्योंकि किसी के मन में ऐसा विचार जो नहीं होता। …


 सुखी संसार

Sukhi sansar by Sudhir Srivastava

किसी का कभी भी

सुखी संसार नहीं होता,

क्योंकि किसी के मन में

ऐसा विचार जो नहीं होता।

संसार उसी का सुखी है

जिसके विचार सुखी हैं,

जो खुद सुखी महसूस करे

उसी का संसार सुखी है।

सुखी संसार एक भावना है

क्योंकि भूखा रहते हुए भी

ईश्वर को धन्यवाद करने की

एक भावना ही तो है,

बावजूद इसके भी

उसका सुखी संसार है।

जो भी है,जैसा भी है

उसका ही संसार है,

क्योंकि सुखी संसार की

परिकल्पना ही तो

उसका सुखी संसार है।

◆ सुधीर श्रीवास्तव

       गोण्डा, उ.प्र.

     8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment