Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Story -sneh| स्नेह

स्नेह  लक्ष्मण तीन दिन पश्चात नदी पार विवाह में राम का प्रतिनिधित्व करके लौटे तो उन्होंने जैसे ही राम के …


स्नेह 

Story -sneh| स्नेह

लक्ष्मण तीन दिन पश्चात नदी पार विवाह में राम का प्रतिनिधित्व करके लौटे तो उन्होंने जैसे ही राम के पाँव छुए , राम ने उन्हें गले से लगा लिया , राम कीऑंखें नम देखकर सीता ने कहा , “ तुम्हारे भैया को तुम्हारे बिना यह तीन दिन ऐसे लगे , जैसे तीन वर्ष हों। ”

लक्ष्मण की ऑंखें भी नम हो आई , “ सच कहूं भाभी , वहाँ इतने लोगों को इकट्ठा देखकर मुझे पहली बार लगा , हम लोग यहाँ जंगल में कितने अकेले हैं।”

“ विवाह कैसा रहा ? “ राम ने पूछा ।

“ उनकी विवाह पद्धति वैदिक परंपराओं से प्रभावित नहीं थी , वह अपने जीवन को नियमों में बाँधने के पक्ष में नहीं हैं ।”

“ तो क्या वे हमसे अधिक सुखी हैं ? “ सीता ने पूछा ?

“ यह मैं कैसे कह सकता हूँ , हाँ उन्हें यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ कि शक्तिवान होते हुए भी, पिता की आज्ञा मानकर भईया बनवास चले आए, वहएक ही जीवन में विश्वास करते हैं , और धनोपार्जन जीवन का लक्ष्य मानते हैं । “

“ और ?” राम ने कुछ पल की चुप्पी को तोड़ते हुए कहा ।

“ उनकी कलाओं में भी व्यक्ति मुख्य है , वे उसके भीतर की नकारात्मकता को स्वीकार करते हुए उसके अनुसार जीवन पद्धति को अपनाये हैं ।”

“ जबकि हम उस नकारात्मकता को अभ्यास द्वारा सकारात्मकता में बदलकर जीवन को अनंत समय के साथ जोड़ना चाहते हैं , उसके लिए हम ऐसासमाज चाहते हैं जिसमें व्यक्ति के हित और समाज के हित एक हो जाएँ। ” सीता ने कहा ।

“ जी भाभी। ”

सीता ने देखा राम की दृष्टि कहीं दूर अपने विचारों में डूबी है।

“ चलो तुम पहले भोजन कर लो , भैया से बातें बाद में कर लेना। ” सीता ने लक्ष्मण से कहा ।

रात का समय था , राम भोजनोपरांत बाहर टहल रहे थे , लक्ष्मण ने पास आकर कहा ।

“ कोई चिन्ता भईया ? “

“ चिन्ता किस बात की , बस नदी पार के लोगों के बारे में सोच रहा था, तुम जानते हो वे अ्पना सामान बेचने जंगल के इस तरफ़ भी आते हैं ।” राम नेकहा ।

“ हाँ , और उनका सामान अयोध्या से बहुत उच्चकोटी का है ।” लक्ष्मण ने जैसे वाक्य पूरा करते हुए कहा ।

“ जानता हूँ उनके भौतिक विलास की कोई सीमा नहीं ।” राम ने अपने ही विचारों में खोये हुए कहा ।

“ वे मनुष्य को मनुष्य नहीं रहना देना चाहते , वे अंदर बाहर सब जगह यंत्रीकरण कर देना चाहते हैं ।” लक्ष्मण ने कहा ।

“ हुँ ।” राम ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा ।

“ आप इस बारे में क्या सोचते हैं ? “ लक्ष्मण ने पूछा

“ में इतना जानता हूँ सुख सुविधाओं की अपनी सीमा है , धरती की मनुष्य को दे सकने की अपनी सीमा है , जितनी भी मशीनें मनुष्य के भीतर डाल दीजाएँ , और उसकी शक्ति को हज़ारों गुणा बड़ा दिया जाये , फिर भी जो सूक्ष्म है वह दूर ही रहेगा , परन्तु यदि व्यक्ति का हित और समाज का हित एक होजाये , तो मनुष्य का उद्विग्न मन शांत हो जायगा , और आवश्यकता से अधिक लेना उसका स्वभाव नहीं होगा , उसका यही ठहराव उसे संतुलित बनाएगा , और वह हर पल स्वयं को इस ब्रह्माण्ड का भाग अनुभव कर पायेगा। ” राम ने लक्ष्मण को देखते हुए कहा ।

“ आपकी बात उचित है भैया ,पर वे गलत हैं , हम यह भी तो नहीं कह सकते। ”

इतने में सीता ने बाहर आते हुए कहा , “ दोनों भाई किस चर्चा में व्यस्त हैं , चाँद को देखो , वो भी ठहर गया है ऊपर। ” सीता ने हाथ से इशारा करते हुएकहा। ”

दोनों भाई हस दिए , और दोनों की दृष्टि यकायक चाँद पर रुक गई।

उस शान्ति को तोड़ते हुए राम ने कहा,

“ यह प्राकृतिक सौंदर्य , यह शांति , यह हमारा स्नेह , यह परिपूर्ण है , शेष सब विखंडित है , और खंडन में कभी सुख नहीं होता , होती है मात्र चाह औरपाने की , जिससे जन्मती हैं विषमतायें, इसलिए लक्ष्मण , उचित अनुचित की एक ही कसौटी है , क्या यह हमें शांति और प्रेम की ओर ले जा रही हैं यानहीं ? इसलिए मेरा पिता की आज्ञा मानना उचित था , तुम्हारा पत्नी से दूर यहां इसे अपना कर्तव्य समझ चले आना उचित है , सीता का मुझसे स्नेह होना, न कि मेरी सुख सुविधाओं से , उचित है। और कोई आश्चर्य नहीं कि, इसीलिए हम यहां राजधानी से दूर , अपने जीवन को सार्थक कर पा रहे हैं। ”

“ जी भैया , आपसे बातें करके मेरे भीतर के सारे संदेह मिट जाते हैं , और मन स्वच्छ हो खिल उठता है ।”

“ अच्छा , “ राम ने हँसते हुए उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “ और जानते हो , तुम्हारे बिना यह कुटिया कैसे प्राणहीन हो गई थी !”

सीता उन दोनों का स्नेह देख गहरे संतोष का अनुभव कर रही थी ।

—- शशि महाजन


Related Posts

अहंकार-R.S.meena indian

January 7, 2022

अहंकार गोलू जब भी मोनू को देखता अपने दोस्तों को कहा करता-किसी जमाने मे मोनू बहुत पैसे वाला था मगर

कहानी-अपने प्यार की तमन्ना-जयश्री बिरमी

December 22, 2021

अपने प्यार की तमन्ना (hindi kahani)   सीमा कॉलेज जाने की लिए निकल ही रही थी कि अमन ने उसे चिड़ाते

गजग्राह- जयश्री बिरमी

December 16, 2021

 गजग्राह कथा के अनुसार जय और विजय नामक दो विष्णु भगवान के दरवान थे ।दोनों ही सुंदर और सुशील थे,

Vairagani by Shailendra Srivastava

November 13, 2021

 वैरागिनी (hindi kahani)   जाड़े की कुनकुनी धूप मे घुटने पर सिर टिकाये वह अपने बारे मे सोच रही थी ।लोग

Sabse nalayak beta lagukatha by Akansha rai

November 9, 2021

 लघुकथासबसे नालायक बेटा डॉक्टर का यह कहना कि यह आपरेशन रिस्की है जिसमें जान भी जा सकती है,मास्टर साहब को

Dahej pratha story by Chanda Neeta Rawat

November 9, 2021

  दहेज प्रथा  गाजीपुर के एक छोटे से गाँव में एक किसान का संपन्न परिवार रहता था किसान का नाम

PreviousNext

Leave a Comment