Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sochte bahut ho kavita by Sudhir Srivastava

 सोचते बहुत हो शायद तुम्हें अहसास नहीं है कि तुम सोचते बहुत हो, इसीलिए तुम्हें पता ही नहीं है कि …


 सोचते बहुत हो

Sochte bahut ho by Sudhir Srivastava

शायद तुम्हें अहसास नहीं है

कि तुम सोचते बहुत हो,

इसीलिए तुम्हें पता ही नहीं है कि

इतना सोचने के बाद

किसी मंजिल पर पहुँचते ही कहाँ हो?

चलो माना कि तुम

किसी और मिट्टी के बने हो।

पर भला ये तो सोचो

इतना सोचकर भी तुम

आखिर पाते क्या हो?

चलो माना कि 

ये तुम्हारा स्वभाव है,

पर ऐसा स्वभाव भी

भला किस काम का,

जो तुम्हें भरमा रहा हो,

तुम्हारे किसी काम

तनिक भी न आ रहा हो।

अपने सोच का दायरा घटाओ,

बस इतना ही सोचो

जो तुम्हारा दायरा ही न बढ़ाये

बल्कि तुम्हारे काम भी आये,

अब इतना भी न सोचो

कि सोचने का ठप्पा

तुम्हारे माथे पर चिपक जाये।

👉 सुधीर श्रीवास्तव

        गोण्डा, उ.प्र.

        8115285921

©मौलिक, स्वरचित

 28.07.2021


Related Posts

kya kahnege bhala us bhaichare ko by ajay prasad

September 14, 2021

 क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को  क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को रोक न पायी  जो मुल्क के

besir pair ki bat mat karna by ajay prasad

September 14, 2021

बेसिर-पैर की  बात मत करना बेसिर-पैर की  बात मत करना दिन को कभी रात मत कहना। रुसबा  न हो जाए

ishq me bhi ab installment hai by ajay prasad

September 14, 2021

 इश्क़ में भी अब इंस्टालमेंट है इश्क़ में भी अब इंस्टालमेंट है आशिक़ी में भी रिटायरर्मेंट है । कितने मच्यौर

Ek stree ki vyatha by Jitendra Kabir

September 14, 2021

 एक स्त्री की व्यथा पहली नजर में… बड़ा सभ्य और सुसंस्कृत नजर आया था वो इंसान, गाली-गलौज पर उतरा वो 

Roya Kabira samajh n paye by H.K. Mishra

September 14, 2021

 रोया कबीरा समझ न पाए रोया कबीरा दीन दुखियों पर, गाया कबीरा मोहताजों पर , संदेश दिया साखी पढ़ कर

Hindi ki mahanta by dr uma singh baghel

September 14, 2021

 हिन्दी की महानता ,  हिन्द हमारी हिन्द की भाषा , हम इसके बासी हैं , मातृभूमि के चरणों में अर्पित,

Leave a Comment