Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sirf vhi aisa Kar payega by Jitender Kabir

 सिर्फ वही ऐसा कर पाएगा इस समय जबकि बढ़ रही हैं इंसान – इंसान के बीच में नफरतें बेतहाशा हर …


 सिर्फ वही ऐसा कर पाएगा

Sirf vhi aisa Kar payega by Jitender Kabir

इस समय जबकि बढ़ रही हैं

इंसान – इंसान के बीच में नफरतें

बेतहाशा हर ओर,

प्रेम के मार्ग पर चलने वालों को

कायर व डरपोक 

करार देने का चला है दौर,

धारा के बहाव के विपरीत प्रेम पर 

आस्था अपनी अटूट जो इंसान रख पाएगा

वही इन नफरतों के बीच में

प्रेम के फूल खिलाएगा।

इस समय जबकि बढ़ रही हैं

इंसान में सिर्फ अपना हित साधने की 

लालसा बेतहाशा हर ओर,

जनहित में हमेशा लगे रहने वालों को

पागल व बेवकूफ

करार देने का चला है दौर,

धारा के बहाव के विपरीत इंसानियत पर

आस्था अपनी अटूट जो इंसान रख पाएगा

वही हैवानियत के बीच में

इंसानियत को जिंदा रख पाएगा।

                                     जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

मुहब्बत जालिम – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

मुहब्बत जालिम किसी की नहीं होती हैजालिम मुहब्बत ये हैबड़ी मगरुर होती हैबड़ी मशहूर होती है बाँधो चाहे पैरों में

फसलों के त्योहार – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

फसलों के त्योहार मकर संक्रांति हम मनाएं गुड़ तिल चावल चढ़ाएंदही चूड़ा गुड़ केला खाखिचड़ी के भोग लगाएंमिलकर खुशी हम

युवा शक्ति जागो रे- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी “

January 15, 2022

“युवा शक्ति जागो रे” जागो- जागो , जागो रे जागो सेवा का हथियार हाथ में“मुझको नही तुझको “के नारे सेदुखियों

राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 15, 2022

 राजनीति भी अजीब  है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी

मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा- R.S.meena Indian

January 15, 2022

कविता -मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा मिल जाये गर रहबर ,हर बात छोड़ दूँगा । कह दूं सोहबतों से, मैं

शोषण- चन्दानीता रावत

January 15, 2022

शोषण जागो मानव के मन, जागोशोषण के विरूद्ध चुपी तोडो़समाज के काले विचारों सेरिश्ता तोडो़, दो जवाब मुड़ कर इनरुढ़िवादी

Leave a Comment