Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

 सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना  लाखों के …


 सिखाने की कोशिश करें

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

सिखाने की कोशिश करें

अपने बच्चों को खाना बनाना भी

पढ़ाई के साथ-साथ,

वरना  लाखों के पैकेज पाने वालों को भी

हमनें ‘मैगी’ खा-खाकर रात-दिन

गुजारा करते देखा है।

सिखाने की कोशिश करें

अपने बच्चों को साफ-सफाई करना भी

पढ़ाई के साथ-साथ,

वरना ‘सैलिब्रिटी’ जैसी लाइफ जीने वालों को भी

हमनें अपने कमरों में गंदी अस्त-व्यस्त जिंदगी

जीते हुए देखा है।

सिखाने की कोशिश करें

अपने बच्चों को बाहरी दुनिया के बारे में भी

पढ़ाई के साथ-साथ,

वरना अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वालों को भी

हमनें दुनिया की भूल-भुलैया में

रास्ता भूलते देखा है।

सिखाने की कोशिश करें

अपने बच्चों को बुजुर्गों से अच्छी तरह पेश आना भी

पढ़ाई के साथ-साथ,

वरना बुढ़ापे में तो बड़ा नाम कमाने वालों को भी

हमनें वृद्धाश्रम में दूसरों की दया पर

पलते हुए देखा है।

                                                  जितेन्द्र ‘कबीर’

                                                  

यह कविता सर्वथा मौलिक, अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment