Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

shiv ke gun gaun by jayshree birmi ahamdabad

शिव के गुण गाउं हर हर भोले बिन तेरे दुनियां डोलेतु योगी, तू नृत्यकार तूही है संगीतज्ञ।तू ने ही रचा …


शिव के गुण गाउं

shiv ke gun gaun by jayshree birmi ahamdabad

हर हर भोले बिन तेरे दुनियां डोले
तु योगी, तू नृत्यकार तूही है संगीतज्ञ।
तू ने ही रचा हैं योग को
तूने ही उसी का ध्यान लगाया हैं।
ओ हर हर भोले हम क्या बोले
गुण तेरे तो जग गाता हैं।
तेरी आराधना करते है नर– नारी
और पूजा हैं तुम्हे गौरा संग।
न ही हैं कोई सिंगार तेरा
न ही हैं कोई गहना।
तेरे हाथों में हैं डमरू
और त्रिशुल हैं साथ में।
भस्म धारित हैं तन तेरा
और गले में सर्प हैं धरा।
मृगछाला हैं वस्त्र तेरे
और गवेंद्र की सवारी हैं।
अर्धनारेश्वर हैं तू
गौरा को भी तन धरी हैं।
सर्व गुनी तू फिर भी
हैं योगेश्वर तू ही।
कंठ धरा हैं विष
फिर भी अधर पे हैं मुस्कान।
तू ही हैं जग का कल्याण दाता
तूने ही जग को तारा हैं।
हे भोले तू ही है आराध्य सबका
जग ने तुझे ध्याया हैं।
कैलाश के निवासी हो तुम
तुझे नमन हो बार बार।
क्रोध तेरा हैं विनाशक
फिर भी तू पालनहारा हैं।
आया हैं सावन फुहारे ले कर
तेरी भक्ति के दिन लाई हैं।
सावन तुम आते हो हर साल
भोले को भी संग में लाते हो।

जयश्री बिर्मी
निवृत्त शिक्षिका
अहमदाबाद


Related Posts

कोशिश- अनीता शर्मा

November 23, 2021

 “कोशिश” कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हिम्मत से आगे बढ़ कर प्रयत्न करते जाना है। मन में

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

November 23, 2021

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत

जीवन रूपी चाय-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 23, 2021

जीवन रूपी चाय! बचपन हमारा, सफेद दूध जैसा, जिंदगी ने लगाया, उबाल यह कैसा, कोई ना, जिंदगी को एक स्वादिष्ट

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

November 22, 2021

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

November 22, 2021

 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन

किस्से मोहब्बत के-तेज देवांगन

November 22, 2021

 किस्से मोहब्बत के किस्से मोहब्बत के किसको सुनाएं, सब यहां कहानीकार बने है। लिख दूं गजल मैं, गर किताबों पे,

Leave a Comment