Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Shipra ke kinare by Dr. H.K. Mishra

 शिप्रा के किनारे महाकाल के प्रांगण में जब , हम दोनों चलकर आए थे , दर्शन पूजन कर शिव का …


 शिप्रा के किनारे

Shipra ke kinare by Dr. H.K. Mishra

महाकाल के प्रांगण में जब ,

हम दोनों चलकर आए थे ,

दर्शन पूजन कर शिव का ,

शिप्रा तट पर चल आए थे  ।।

महाकाल की महिमा सारी ,

नगरी पर आच्छादित थी ,

शिप्रा अपनी गोदी में ले ,

सरल स्वच्छ प्रवाहित थी ।।

कहता मेरा अपना दर्शन ,

कालिदास की प्रणय कथा ,

शिप्रा संग  प्रवाहित  है ,

यही उज्जैन शिव नगरी है ।।

कालिदास का मेघदूत है ,

लेकर आया प्रणय संदेश ,

उज्जैन नगर पर मेघा छाया,

शिव दर्शन को आतुर है।  ।।

कितना अच्छा सौभाग्य तुम्हारा,

प्रणय कथा से आप्लावित हो ,

चल कर आया शैल शिखर पर,

मेघा को विराम  मिला  है  ।।

नूतन नूतन कवि गीतों को ,

गाने का सौभाग्य मिला है ,

गा मेघा ऊंचे स्वर में कुछ,

मुझको भी आह्लाद मिला है ।।

सुन मेघा जाना है तुझको,

पावन पथ पर गबन तुम्हारा,

विरह  कांता से  मिलना है ,

संदेशा कवि का भी देना है  ।।

सफल बहुत हो यात्रा तेरी ,

युगल प्रणय संयोग निभाना,

प्रणय हृदय के विशेष दूत हो,

साहित्य सरिता का  संगम हो।।

तुम पर है अभिमान हमारा,

हर लेना  संताप सभी  का,

निर्मल निश्छल मेघा तेरा ,

प्रणय ह्रदय मनुहार तुम्हीं ।।

पावन तेरी रिमझिम वर्षा ,

हरने को मनुताप मिला है,

संदेश हमारा देना जाकर ,

मेरी प्रिया वियोग पड़ी है ।।

मिलने को मेरा मन आतुर,

विरह प्रेम में कैसी होगी ,

आ कर देना संदेश शीघ्र ही,

नभ पर  तेरा ही शासन है  ।।

मेघदूत तुम कालिदास के ,

हर विरही के मन भावन ,

विरही मन शांत नहीं रहता,

करना पावन जीवन अर्पण ।।

शिप्रा तट पर मेरी कुटिया ,

पुन: मिलेंगे  इस  तट पर ,

हम कर लेंगे प्रतीक्षा तेरी ,

पावन जल अर्पण तुझको।।

मौलिक 
                  डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                   बोकारो स्टील सिटी
                      झारखंड ।


Related Posts

Man mastishk kavita by Anita Sharma

August 6, 2021

 मन-मस्तिष्क मन-मस्तिष्क में उमड़ते-घुमड़ते, विचारों की शृंखला। कितनी उलझी-सुलझी गुत्थियां , उठते-गिरते विचार । *** कितनी लहरें सुख-दुःख की समांई

Meghmala kavita by dr. H.K Mishra

August 6, 2021

 मेघमाला आते जाते देखा है अपनो को , सुख दुख को देखा जीवन में , राह नया कुछ रचती चल

Tanashahi pravitti kavita by Jitendra Kabir

August 6, 2021

 तानाशाही प्रवृत्ति हर कोई चाहता है कि सहमत हों, सब उसके विचारों  और कर्मों से, उसके मन-मुताबिक ही दुनिया चले,

Sochne se kuch nahi hoga by Jitendra kabir

August 6, 2021

 सोचने से कुछ नहीं होगा जब तक रहेगा कोई नया, अच्छा व क्रांतिकारी विचार हमारे दिमाग में ही, व्यवहारिक रूप

Beti ki taqat kavita by Sudhir Shrivastava

August 6, 2021

 बेटी की ताकत बिटिया मैंनें जन्मा है तुझे तेरा जीवन भी संवारुँगी, पढ़ा लिखाकर काबिल बनाऊँगी तुझे तेरी पहचान दिलाऊँगी,

Premchand samaj ke chitere by Indu kumari

August 4, 2021

 प्रेमचंद समाज के चितेरे गोरी सुरत घनी भौहें नाक नुकीले छोटी आँखें गुच्छी हुई बड़ी- बड़ी मूछें प्यारी मुस्कान चेहरे

Leave a Comment