Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Shikshak divas vishesh kavita mere guruji by dr. Kamlendra kumar

 शिक्षक दिवस पर विशेष कविता           मेरे गुरुजी  आँखों मे चश्मा चमक रहा, है गेहुंआ रंग । …


 शिक्षक दिवस पर विशेष कविता     

     मेरे गुरुजी 

Shikshak divas vishesh kavita mere guruji by dr. Kamlendra kumar

आँखों मे चश्मा चमक रहा,
है गेहुंआ रंग ।
धोती कुर्ता पहन कर आते ,
अजब निराले ढंग ।।
पतली छड़ी साथ वो लाते ,
जब कक्षा में आते ।
सब डर जाते देख  छड़ी को ,
दौड़ दुबक हम जाते ।।
फिर कहते एक पाठ निकालो,
मोनू जरा पढ़ो तुम,
ध्यान कहाँ है प्यारे बच्चे,
क्यों बैठे हो तुम गुम सुम।।
मोनू भैया थर थर कांपे ,
कुछ बोल ना पाए।
आँखों मे चमक सी आयी,
सुब्रत सर जब आये।।
सुब्रत सर जब  बोले सर से,
दूर छड़ी तुम फेंको ।
अच्छे प्यारे बच्चे है ये,
फिर होशियारी देखो।।
सर बोले फेंक छड़ी को,
डर कर कभी पढ़ो मत।
अच्छी बातें अपना लो ,
गंदे कामों की छोड़ो लत ।।
कक्षा बिल्कुल सुधर गयी,
जम कर नाम कमाया।
नाम हो गया मेरे सर का,
पुरुस्कार भी  पाया।।
डॉ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
राव गंज कालपी ,जालौन
उत्तर प्रदेश पिन 285204
मोबाइल नंबर9451318138
ईमेल om_saksham@rediffmail.com
————————————————————
                          परिचय
नाम-डॉ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
पिता का नाम-श्री बनवारी लाल श्रीवास्तव
शिक्षा -एमएससी ,बीएड, पीएचडी
लेखन विधा- कैरियर आलेख ,बाल साहित्य
सम्प्रति- शासकीय शिक्षक
अन्य -स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशन


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment