Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh

Sharad purinima by Jay shree birmi

 शरद पूर्णिमा अपने देश में ६ ऋतुएं हैं और हर ऋतु का अपना महत्व हैं।जिसमे बसंत का महत्व ज्यादा ही …


 शरद पूर्णिमा

Sharad purinima by Jay shree birmi

अपने देश में ६ ऋतुएं हैं और हर ऋतु का अपना महत्व हैं।जिसमे बसंत का महत्व ज्यादा ही हैं।बसंत में बाहर आती हैं फूल खिलते हैं और बाग– बगीचे रंग रंग के फूलों से सज जाते हैं।कुदरत रंग और सुगंध से महक उठती हैं और एक आनंदमय लहर उठती हैं जो प्यार करने वालों के लिए एक मौसम बन जाता हैं अपनी उर्मियो को एक दूसरें को बताने के लिए।वैसे भी प्रेमियों में चांद का स्थान बहुत ही महत्व रखता हैं। प्रेमगितों में भी चांद का उल्लेख हमे देखने को मिलता हैं।सैंकड़ों गीतों में चांद के बखान करती पंक्तियां देखने को मिलती हैं।कभी वह प्रेम का साक्ष हैं तो कभी प्रेमिका की सूरत के साथ चांद की खूबसूरती को जोड़ा जाता हैं।

वैसे ही शरद ऋतु का महत्व भी कम नहीं हैं।बारिशें खत्म हो जाती हैं और तृप्त हुई धारा ठंडी हो जाती हैं एक तपिश थी जो धारा की वह शीतल हो जाती हैं,एक खुशनुमा सी शीत लहर में तन  और मन दोनों को सकून देती हैं और प्रारंभकाल हैं ये सर्द मौसम का।इसे धवल रंगी उत्सव भी कहते हैं।इस उत्सव का श्री कृष्ण के साथ भी गोपियों का अनुबंधन भी कहा जाता हैं।चीरहरण के बाद प्रसन्न हो गोपियों को श्री भगवन ने महारासलीला के आयोजन का वचन दिया था जो शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था।इसी दिन रासलीला का आनंद प्राप्त करने के लिए गोपियां व्रज को छोड़ वृंदावन आ गई थी,और यमुना तट पर श्री कृष्ण ने ऐसी बांसुरी बजाई कि गोपियां सुध–बुध भूल गई और कृष्ण प्रेम में खो गई थी।और अपनी लीला से प्रभु ने अनेकों रूप धारण कर सभी गोपियों ने कृष्ण  संग  रास  कर उनका जीवन धन्य कर लिया था।

कहा जाता हैं की शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मीजी भी विचरण करती हैं,और जो जागकर पूर्णिमा का स्वागत कर रहें हैं उन्हे धनवान बना देती हैं।

गुजरात में इस दिन रास खेला जाता हैं और समूह मिलन का आयोजन भी होता हैं।दूध में पौहे भिगो कर चांदनी में रख कर रात के १२ बजे खाए जाते हैं,मेथी के पकोड़ो के साथ।कई लोग  दूधपोहे की बजाय खीर भी बनाके चांदनी में रखते हैं।

इस चांदनी का महत्त्व कम नहीं हैं,आंखो का तेज बनाए रखने के लिए चांदनी के उजाले में सूई में धागा पिरोने की भी प्रथा हैं।लोग इसी चांदनी में  आंखों में लगाने वाला सुरमा भी बनाते हैं।और भी कई प्रसंगों से जुड़ी हुई शरद पूर्णिमा का हमारे जीवन में एक महत्व का स्थान रहा हैं और रहेगा।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

विश्व बैंक का लॉजिस्टिक (माल ढुलाई) परफारमेंस इंडेक्स 2023 जारी

April 26, 2023

मज़बूती से विकसित होते भारत की गाथा में नए अध्याय जुड़े विश्व बैंक का लॉजिस्टिक (माल ढुलाई) परफारमेंस इंडेक्स 2023

दूध ब्रांड पर युद्ध की गरमाई !

April 25, 2023

दूध ब्रांड पर युद्ध की गरमाई  दही पर विवाद के बाद अब दूध ब्रांडो पर सियासी शाब्दिक जंग ! दूध

प्रस्तावित चलचित्र (सिनेमैटोग्राफ) संशोधन विधेयक 2023

April 25, 2023

 प्रस्तावित चलचित्र (सिनेमैटोग्राफ) संशोधन विधेयक 2023  चलचित्र (सिनेमैटोग्राफ) अधिनियम 1952 में संशोधन को मंत्रिमंडल की मंजूरी – मानसून सत्र में

चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा।

April 25, 2023

चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 19

अपने ही अपनों की आंखों मे तब खटकते

April 25, 2023

अपने ही अपनों की आंखों मे तब खटकते आज कि भागमभाग जिंदगी में हर कोई एक दूजे से आगे निकलना

द स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट एनुअल रिपोर्ट 2022

April 25, 2023

द स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट एनुअल रिपोर्ट 2022 विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएचओ) वार्षिक रिपोर्ट 202 ज़ारी वैश्विक स्तरपर

PreviousNext

Leave a Comment