शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
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शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
July 3, 2021
कैसा धर्म तुम्हारा ? कहाँ से तूने अपनाए , जीवन का अजब पहाड़ा ? एक दूजे में भेद तू करते,
July 3, 2021
क्यूँ आपस में लड़ना ? जाति -धर्म के नाम पर नित दिन, क्योंकर रार मचाते ? हर मानव एक ही
July 3, 2021
बनेगा अपना देश महान कल तक थे जो चोर–बेईमान, वो बन गये हैं रातों–रात ही बड़े शरीफ इंसान, अवसरवादियों को
July 3, 2021
यादों का तराना *** इस कदर सजाया है तेरी यादों को, कि मेरा आशियाना बन चुका है, इन्हीं आशियाने में,
July 3, 2021
कैसी पूजा ? दया – प्रेम ना उर अंतर में , और पूजा पत्थर की । हे मानव यह कैसी
July 3, 2021
व्यंग्य-कवितापरवाह कौन करे जो स्वत: मिल रहा जीवन में, उसकी परवाह कौन करे। आती सांसे जाती सांसे, सांसो पर जो
Nice poem