शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
August 22, 2021
लोकशाही एक जमाने में पूरी दुनियां में राजा रानियों का राज था।सभी देशों में राजाओं का शासन था,और लोग उनकी
August 22, 2021
*वर्तिका जल रही* नित वर्तिका है जल रही, रौनक जहां को कर रही। स्वयं को जलाये प्रतिपल दैदीप्यमान जग को
August 22, 2021
देश हमारा भारत भारत भूमि हमें तुमसे प्यार है जननी हमारी हम सेवा में तैयार है शीश-मुकुट अडिग हिमालय चरणों
August 22, 2021
शान ए हिंद शान हैं मेरी तू ही ओ तिरंगे जान हैं मेरी तूही ओ तिरंगे चाहे दिल मेरा तू
August 22, 2021
खेल कराते मेल ============ राष्ट्रीय एकता की मिसाल देखना चाहते हो तो खेल और खिलाड़ियों को देखो। देश के अलग
August 22, 2021
मैं क्या लिखूं कभी जो मन बड़ा बेचैन हो जाताचाहता है कुछ बोलना पर कह नहीं पाताआसपास की घटनाएं करती
Nice poem