शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
August 25, 2021
रक्षाबंधन सालभर के इन्तजार के बाद आता राखी का त्यौहार है। रेशम के धागों में सजता भाई-बहिन का प्यार है।
August 25, 2021
भूख भूख की आग से तड़पता है कि भिखारी हाथ फैलाए भीख मांगता। कहीं कचड़े में कोई जीर्ण शीर्ण सा
August 25, 2021
समाज की तस्वीर समाज की तस्वीर का बखान क्या करें साहब ? समाज कोई वस्तु तो है नहीं जो किसी
August 25, 2021
राखी का त्योहार राखी का त्योहार हम मनाएं रे उमंग भरी है मन में मिलकर गाएं रे बचपन की तकरार
August 22, 2021
सबका अपना महत्व है किसी क्षेत्र में कामयाब होने के लिए इंसान को जितनी बड़ी भूमिका किसी का प्रोत्साहन निभाता
August 22, 2021
संघर्ष अकेला होता है उस वक्त साथ नहीं थे बहुत से लोग शायद जानते भी न हों उनका नाम, खेलों
Nice poem