शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
September 4, 2021
कैकेयी के राम कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को
September 4, 2021
कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!! कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे । द्रुपद सुता की लाज बचानें।। दरबार सजा जब कौरव का ।
September 4, 2021
मूलभूत समस्याएं वही हैं एक वक्त का खाना जैसे तैसे जुटाकर दूसरे वक्त की चिंता जिस इंसान के दिमाग में
September 4, 2021
रिश्ता की दूरियां-नजदीकियां रिश्तों का महत्व लंबी दूरियों से नहीं मन की दूरियों से होता है, अन्यथा माँ बाप और
September 4, 2021
तीर नदी का तीर नदी का दूर किनारा , कहां नहीं तुझको ढूंढा है, रात अंधेरी नदी उफनती, मिलन अंत
August 29, 2021
झूठों का है जमाना एक बार झूठ बोल कर उसे छुपाने के लिए झूठ पर झूठ बोलते जाना, पकड़े भी
Nice poem