शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
October 23, 2021
भूखे की धर्म – जात नहीं होती इस कविता को पढ़ने वाला उनमें नहीं आता लिखने वाला भी नहीं, इसलिए
October 23, 2021
माँ सिद्धिदात्री नवम रुप माँ जगदम्बे का माँ सिद्धिदात्री कहलाती है, शंख, चक्र,गदा, कमल मैय्या धारण करती है। कमल आसन
October 22, 2021
शून्य “तुमने मेरे लिए अब तक किया ही क्या है?” गुस्से के आवेश में अक्सर बोल दिए जाने वाले यह
October 22, 2021
मोहक रास लीला…!! मुग्ध कर देनें वाला अनुपम लावण्य , सुबह की धूप सा छिटका हुआ सौंदर्य ,साँझ
October 22, 2021
आजकल के सियासतदां मारना जो हो कभी ‘श्वान’ तो दे कर उसे पागल करार खूब कर दो बदनाम ताकि जब
October 22, 2021
आर्य सभ्यता मेरी मानव सभ्यता धरा धाम का, प्राचीन धरोहर अपना है , सिंधु तट पर विकसित होकर, घाटी घाटी
Nice poem