शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
November 7, 2021
राष्ट्र की बेटी इन्दु सी जगमग करती ह्रदय को शीतल करती प्रेरणा बनी स्वराष्ट्र की नारी शक्ति कहलाती नाम की
November 7, 2021
अन्तर्द्वन्द अजीब पहेली से है सुलझ नहीं पा रही नफरत और प्रेम की गुथ्थियाों का ये मंजर असमंजस की स्थिति
November 7, 2021
रावण को हर बार आना है रावण लौट आया है, मन बड़ा घबराया है। छोटी को कहा था, बाहर मत
November 7, 2021
रोटियाँ…!!! हमनें पूरे जीवन में कुल दस रोटियाँ बनाईं पहली माँ के लोइयों को थपथपाई खुशियाँ मनाई नाची
November 7, 2021
हथकड़ियाँ पहना दे….!!! प्रतिबन्धित जब हरी कलाई , हथकड़ियाँ पहना दे…!! कंगन की खन-खन में चूड़ी
Nice poem