Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

sawam ki rachyita by priya gaud

 “स्वयं की रचयिता” तुम्हारी घुटती हुई आत्मा का शोर कही कैद न हो जाये उलाहनों के शोर में इसलिए चीखों …


 “स्वयं की रचयिता”

sawam ki rachyita by priya gaud

तुम्हारी घुटती हुई आत्मा का शोर

कही कैद न हो जाये

उलाहनों के शोर में

इसलिए चीखों जितनी ताक़त है

तुम्हारे भीतर और हिला दो वो चट्टान

जो रौंदता हो तुम्हारे सपने

जकड़ लिए जाए हाथ पैर तुम्हारे 

डाल कर जंजीरे 

बांध दिया जाए घर के आंगन में

दिखाने के लिए खोखलेपन से भरे

कालिख़ लिए दूर से चमकते चेहरे और

कपड़ो से खुद को सजाएं नंगे समाज को

पर तुम ,

लगाकर पूरा जोर अपनी चिंगारी से

गला दो लोहे की वो जंजीरे

और कुंच करो अपनी दुनिया में

छीन ली जाए किताबें 

दिए जाने लगे उलाहने

काली,छोटी,मोटी, बदसूरत कह कर 

तय किया जाने लगे तुम्हारे सुशील,सुंदर

सुघड़ होने का पैमाना

तो आग लगा दो ऐसी मानसिकता को

चीखों,चिल्लाओ,आवाज़ उठाओ

क्योंकि

आज़ादी,मन,ख़ुशी, और आत्मसम्मान 

नही है जागीर किसी एक की

है ताक़त तो हिला सकती हो चट्टान 

है ताक़त तो गला सकती हो लोहा

हैं ताक़त तो पा सकती हो आज़ादी

है ताक़त तो बना सकती हो नया समाज

है ताक़त तो खोल सकती हो संभावनाओ के दरवाजे

तुम्हारी एक चीख़ दिलाएगी सारा जहान 

नही रचे जाते इतिहास रचे जाते हैं भविष्य

जिसकी रचयिता तुम हो सिर्फ तुम ………

@प्रिया गौड़


Related Posts

नकाब ओढ़े चेहरे

October 23, 2021

 नकाब ओढ़े चेहरे चुंकि फायदेमंद रहती हैं हिंसक व अराजक परिस्थितियां चुनावों में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए, इसलिए ज्यादातर

हृदय के चाँद

October 23, 2021

 हृदय के चाँद                                  

Pahle se bhi jyada by Jitendra Kabir

October 23, 2021

 पहले से भी ज्यादा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देकर सरकार बनाने वाले लोग जब खुद ही लिप्त रहें सारा

Sharad chandra kirne by Anita Sharma

October 23, 2021

 शरद-चंद्र-किरणें* ऐ तकदीर मेरी मुझको चाँद से मिला रही। इक चाँद आसमान में इक है मेरे पास भी। सितारों ने

Sharad purinima by Dr. indu kumari

October 23, 2021

 शीर्षक–शरद पूर्णिंमा  पूनम की रात आई प्रेम की बरसात लाई राधा संग मिल गोपियां कान्हा संग रास रचाई धरा अनुपम

Dhwaj trivarn hai chhane ko by Arun kumar sukla

October 23, 2021

 ध्वज त्रिवर्ण है छाने को, है उठी लालिमा पूरब से, नभ केसरिया कर जाने को। यह क्षण है दिग नभमण्डल

Leave a Comment