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Ankur_Singh, poem

Saraswati vandana basant panchami special

सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी ! करो अपनी कृपा अपरम्पार।हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !बुद्धि …


सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष

Saraswati vandana basant panchami special
हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी !

करो अपनी कृपा अपरम्पार।
हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !
बुद्धि दे !, करो भवसागर से पार।।

हे कमलवसिनी !, हे ब्रह्मापुत्री !
तम हर, ज्योति भर दे।
हे वसुधा !, हे विद्यारूपा !
वीणा बजा, ज्ञान प्रबल कर दे।।

हे वाग्देवी !, हे शारदे !
हम सब है, तेरे साधक।
हे भारती !, हे भुवनेश्वरी !
दूर करो हमारे सब बाधक।।

हे कुमुदी !, हे चंद्रकाति !
हम बुध्दि ज्ञान तुझसे पाए।
हे जगती !, हे बुद्धिदात्री !
हमारा जीवन तुझमें रम जाए।।

हे सरस्वती !, हे वरदायिनी !,
तेरे हाथों में वीणा खूब बाजे।
हे श्वेतानन !, हे पद्यलोचना !
तेरी भक्ति से मेरा जीवन साजे।।

हे ब्रह्म जाया !, हे सुवासिनी !
कर में तेरे ग्रंथ विराजत।
हे विद्या देवी !, हे ज्ञान रूपी !
ज्ञान दे करो हमारी हिफाजत।।

About author 

Ankur Singh
अंकुर सिंह
हरदासीपुर, चंदवक
जौनपुर, उ. प्र.

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