Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Ankur_Singh, poem

Saraswati vandana basant panchami special

सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी ! करो अपनी कृपा अपरम्पार।हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !बुद्धि …


सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष

Saraswati vandana basant panchami special
हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी !

करो अपनी कृपा अपरम्पार।
हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !
बुद्धि दे !, करो भवसागर से पार।।

हे कमलवसिनी !, हे ब्रह्मापुत्री !
तम हर, ज्योति भर दे।
हे वसुधा !, हे विद्यारूपा !
वीणा बजा, ज्ञान प्रबल कर दे।।

हे वाग्देवी !, हे शारदे !
हम सब है, तेरे साधक।
हे भारती !, हे भुवनेश्वरी !
दूर करो हमारे सब बाधक।।

हे कुमुदी !, हे चंद्रकाति !
हम बुध्दि ज्ञान तुझसे पाए।
हे जगती !, हे बुद्धिदात्री !
हमारा जीवन तुझमें रम जाए।।

हे सरस्वती !, हे वरदायिनी !,
तेरे हाथों में वीणा खूब बाजे।
हे श्वेतानन !, हे पद्यलोचना !
तेरी भक्ति से मेरा जीवन साजे।।

हे ब्रह्म जाया !, हे सुवासिनी !
कर में तेरे ग्रंथ विराजत।
हे विद्या देवी !, हे ज्ञान रूपी !
ज्ञान दे करो हमारी हिफाजत।।

About author 

Ankur Singh
अंकुर सिंह
हरदासीपुर, चंदवक
जौनपुर, उ. प्र.

Related Posts

Meera diwani kanha ki by Indu kumari

August 22, 2021

 मीरा दीवानी कान्हा की मीरा दीवानी कान्हा की प्रेम से छलकत जाय  जागत रहे दिन -रात फिर भीदरस ना पाय 

Kahin jashn kahin hatasha by Anita Sharma

August 22, 2021

 कहीं जश्न,कहीं हताशा* समय परिवर्तित होता तो है, पर…इतना ? किसी देश में जश्न आजादी, तो कहीं परतंत्रता छाई।  

Kahun kaise by Indu kumari

August 22, 2021

 कहूं  कैसे  मिलूं तो होंठ सट जाते हैं ऐसे रात के अधखिले फूल हो जैसे चाहकर भी वे हिल नहीं

Sirf dikhane ki cheez by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 सिर्फ दिखाने की चीज देखता हूं बहुत बार अपने आस-पास दुनिया भर में अपने भाई चारे और अच्छे रिश्तों का

Aadarsh pesh karte mananeye by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 आदर्श पेश करते माननीय जब देश की संसद में होती है धक्का-मुक्की, हाथापाई, मार-कुटाई, आए दिन सरेआम, तो आम जनता

Azadi kish liye chahi thi humne by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 आजादी किस लिए चाही थी हमनें हम भारतीयों के साथ भेदभाव करते थे अंग्रेज खुद को कुलीन मानकर, नीचा दिखाते

Leave a Comment