Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sapne by shri shiv narayan jauhari vimal

 सपने दो आँख चिपका दी गई हैं हरेक चहरे पर पढो दस्तावेज दुनिया की चित्रपट देखो और सुलझाओ पहेली दीन …


 सपने

Sapne by shri shiv narayan jauhari vimal

दो आँख चिपका दी गई हैं

हरेक चहरे पर

पढो दस्तावेज दुनिया की

चित्रपट देखो और

सुलझाओ पहेली

दीन दुनिया की  |

 

रोशनी हो मन साथ हो

और ऑंखें खुली हो

तो दुनिया का सफ़र संभव

आँखे बंद कर के अंधेरे में

सफ़र की कोंई भी

सीमा नहीं होती |

 

उस आँख को जिससे

देखते हैं रात भर सपने   

रोशनी की मन की  

जरूरत ही नहीं होती |       

पुरानी खोल कर फ़ाइल

मन चाही कोई तस्वीर

फिर से दिखा सकती हैं

चहरे पर लगी आँखे |

सपनों वाली आँख में

यह क्षमता नहीं होती |

 

कहाँ है और कैसी है

कितनी बड़ी है वह आँख  

अँधेरे मैं देखने की क्षमता

दी गई  जिसको |

एक ही पेड़ में

दो अलग रंग के फूल |  |

 

सपने देखने में

कोइ भी खतरा नही है  

न विवाद न आस्तीन में खंजर

न दंगे न पथराओ लाठी चार्ज     

 न रेल को रोके बैठी हुई भीड़

न छुआ छूत न रिज़र्वेशन

न वद्रोह के नारे |

सुख शान्ति के  साम्राज्य में

धीरे से उतरते स्वपन के पंछी |   

 

स्वप्न बुनने की कला और         

दक्षता प्राप्त है उस आँख को |

कहीं की ईंट कहीं का रोढा

भानमती ने कुनबा जोड़ा

इस तरह भानमती  के डिब्बे से

उठाई  चिंदियों से त्वरित  

बुन लेती नया सपना |                                 

सम्मोहन से भरी

वह झील सपनों की  

द्रष्टा डूब जाता है |

पकड़ कर स्वप्न की उंगली

कभी निद्रित अवस्था मैं  

चला जाता है मीलों तक |

 

सपने में जिस घटना ने

डराया था चाहे जीवन में

घटित वह हो नहीं पाई   

किन्तु वैसा हो न जाए

इसी आशंका से घिरे

हम रोज़ मरते हैं |

जो होना है वह

हो कर ही रहेगा

किसी का कोई उस

पर बस नहीं चलता |

  

अधिकांश सपने

सच नहीं होते 

मगर कोनसा सपना

सत्य का पूर्बाभास है

यह कह सकना कठिन है  |

मस्तिस्क के किसी कोने में

छिपी होगी वह आँख

वैज्ञानिकों के पास भी

इसका कोइ उत्तर नहीं

श्री शिवनारायण जौहरी विमल


Related Posts

Hijab by Ajay Kumar jha.

August 26, 2021

 हिजाब. खाली जेबों की कसी मुट्ठियाँ हवा में लहराने को उतर आई है अरण्य में खिलते अग्निपुष्प से रंगे  सियार

Sirf vhi aisa Kar payega by Jitender Kabir

August 26, 2021

 सिर्फ वही ऐसा कर पाएगा इस समय जबकि बढ़ रही हैं इंसान – इंसान के बीच में नफरतें बेतहाशा हर

Mat banto Insan by indu kumari

August 26, 2021

 मत बाँटो इंसान मंदिर- मस्जिद गिरजाघर ने बाँट दिया भगवान     को मंदिर बाँटी मस्जिद बाँटी मत बाँटो  इंसान   

Balkavita ghar by mainudeen kohri

August 25, 2021

बाल कविता घर  घर ,गाँव – गली झूलेंगे झूले ।  नन्नी – नन्नी, प्यारी – प्यारी बेटियाँ ।।  झूलो के

Rakshabandhan by mainudeen kohri

August 25, 2021

रक्षा बंधन सदियों सेरक्षाबंधन का पर्वजात-पांत से ऊपर उठकरपुनीत पर्व को मनाते हैं । राष्ट्रहित मेंसमाज के हर वर्ग के

Aankhe by nandini laheja

August 25, 2021

आँखें मन के भावों को बिना शब्द,किसी तक पहुंचाए। कभी प्रश्न कहे,कभी दे स्वयं उत्तर,यही तो नयनो की भाषा कहलाये।

Leave a Comment