Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Samasya ke samadhan ke bare me sochne se raste milte hai

समस्या के बारे में सोचने से परेशानी मिलती है – समाधान के बारे में सोचने से रास्ते मिलते हैं किसी …


समस्या के बारे में सोचने से परेशानी मिलती है – समाधान के बारे में सोचने से रास्ते मिलते हैं

Samasya ke samadhan ke bare me sochne se raste milte hai

किसी भी समस्या के समाधान के लिए संवाद का सकारात्मक विकल्प एक मूल्यवान अवसर – एड किशन भावनानी गोंदिया

 – भारतीय सभ्यता में संस्कार, आज्ञाकारी और मान सम्मान का महत्वपूर्ण स्थान है। भारत की मिट्टी में ही अनेक मानवीय गुण समाए हैं जो हर नागरिक की काया में जन्म से ही समाहित होते हैं। भारतीयता की यह पहचान रही है कि हर समस्या को उच्चताप, गुस्से या उद्दंडता से नहीं बल्कि संवाद माध्यम से सुलझाने में विश्व प्रसिद्ध है और इस भारतीय मंत्र के कारण ही भारत की पहचान एक शांतिप्रिय देश के रूप में जगप्रसिद्ध और जगजाहिर है।….साथियों बात अगर हम समस्याओं से चिंता की करें तो, बड़े बुजुर्ग कहते हैं चिंता चिता के समान है।
 मानसिक रोग से बचना है तो किसी भी बात को सोचने के बजाय उसका हल तलाशें। पूरी नींद सोने से दिमाग को आराम मिलेगा नहीं तो मानसिक रोग की समस्या होगी।मानसिक रोग दिवस पूरे विश्व में मनाया जाएगा। मानसिक रोग चिकित्सकों का इस बात पर जोर है कि लोग किसी भी बातको लगातार न सोचें, लगातार सोचने की आदत मौत के मुंह तक ले जा सकती है। हर एक मिनट का हिसाब रखती, भागदौड़ भरी आज की जीवनशैली में सबसे बड़ी और उभरती हुई समस्या है मानसिक तनाव। हर किसी के जीवन में स्थाई रूप से अपने पैर पसार चुका तनाव, व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। इसके प्रति जागरूक होने के साथ टेंशन को दूर करना होगा।…
साथियों बात अगर हम चिंता से तनाव की तरह तो,तनाव से मिलेंगी बीमारियां!!!तनाव से आपको सिरदर्द, माइग्रेन उच्च या निम्न रक्तचाप,हृदय से जुड़ी समस्याओं का शिकार बनाता है। सबसे अधिक हार्ट अटैक का प्रमुख कारण मानसिक तनाव है। यह आपका स्वभाव चिड़चिड़ा करने के साथ आपकी मुस्कान को चुरा लेता है। इससे बचने के लिए तनाव पैदा करने वाले अनावश्यक कारणों को जीवन से दूर करना जरूरी है… साथियों बातअगर हम समस्याओं के समाधान की करें तो समस्याओं को सही तरीके और कौशलता से समाधान करे, प्रायःअंतरवैयक्तिक कौशलता का मतलब छोटी या बड़ी समस्या का आप पर होने वाला प्रभाव एवं उस समस्या के समाधान से ज्यादा आपका उस पर समस्या के प्रति आपका अपना व्यवहार प्रदर्शन होता है कि आप कैसे उसका समाधान ढूँढ़ते है, इसलिए ऐसी परिस्थिति मे शांतचित्त होकर समस्या के समाधान में प्रभावी कदम उठाने की क्षमता ही आपकी अंतर वैयक्तिक कौशल का विकास करेगा। यह आपकी समस्या का समाधान करेगा तथा संवाद को टूटने से बचाएगा, जिससे समस्याएँ बढ़ती हैं। शांतचित्त होना भी आपको मदद करता है,क्योंकि जब आप तनाव में होते हैं तो सही संवाद स्थापित नहीं हो पाती है।…साथियों बात अगर हम समस्या की करें तो, आधुनिकता के इस दौर में हम सभी एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हुए हैं। कैसे आगे निकला जाए, ऐसी बातें सोच-सोचकर हम खुद को ही बीमार बना रहे हैं घर- परिवार, नौकरी या किसी भी मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा सोचना सेहत के लिए नुकसानदेह है। यह हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी रूप में आता है और मानवीय स्वभाव से वशीभूत होकर कई मनुष्य नकारात्मक घेरे में चले जाते हैं। अगर इसे हम आध्यात्मिक भाषा में कहें तो कॉल हमेशा मनुष्य को भटकाने के लिए तत्पर रहता है, परंतु यह मनुष्य के ऊपर है कि सचेतहोकर काल से बच जाए। अर्थात समस्या से मुकाबला कर उसका समाधान के बाद में सोच कर उसका रास्ता निकालने में ही भारतीयता का परिचय है जो हमारी मिट्टी में समाया है, इसका मूल आधार है संवाद!!! समस्या के समाधान के लिए सुलह,शांति और बातचीत ही एकमात्र विकल्प है!!…
साथियों बात अगर हम संवाद की करें तो संवाद से ही हर समस्या का समाधान निकलता है। हमने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखे हैं कि कई बड़े-बड़े मसले और परेशानियां संवाद के आधार पर ही सुलझाए गए हैं और आज भी यह संवाद का मंत्र काफी कारगर सिद्ध हो रहा है और समस्याओं को पटखनी देने में सफल सिद्ध होता है। परंतु संवाद की भी अपनी अलग सीमाएं और मर्यादा होती है, कठिन हालात मैं संवाद पर सावधानी से काबू पाए-संवाद के दौरान कठिन परिस्थितयों में आपको अपनी भावनाओं पर काबू पाने की क्षमता होनी चाहिए तथा हमें दूसरों के भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। हमें लोगों की भावनाओँ के बारे पूर्वानुमान लगा लेना चाहिए, जब आप मुश्किल हालात पर बात कर रहे हों। यदि आवश्यक हो तो हमे लोगों को समझने के लिए समय देनाचाहिए ताकि वे अपनी भावनाओं पर काबू पा सके। प्रायः किसी भी प्रकार के परिवर्तन की स्थिति में संवाद स्थापित करना मुश्किल होता है। अतः उन परिवर्तनकारी परिस्थितियों को समझना आवश्यक है न कि तुरन्त नकारात्मक तरीके से प्रतिक्रिया जता देना। क्योंकि इससे सामान्य ढंग से काम करना मुश्किल होता है। परिवर्तन अपने साथ नए अवसरों को भी साथ लाती है तथा परिवर्तन को टाला भी नही जा सकता। अतः सकारात्मक नजरिया का होना तथा ऐसे कठिन हालातों पर संवाद स्थापित कर पाना ही मुश्किल परिस्थतियों को पार पाने का सबसे महत्पूर्ण तरीका है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि समस्या के बारे में सोचने से परेशानी मिलती है तथा समाधान के बारे में सोचने से रास्ते मिलते हैं इसलिए हमें किसी की समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक संवाद के विकल्प को ही चुनना चाहिए क्योंकि यह विकल्प एक मूल्यवान अवसर है जो सफलता की सीढ़ी का प्रथम पहिया हैं जिसके आधार पर हम सफलता की पूरी सीढ़ी चढ़कर मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

शिक्षा मानव बौद्धिक क्षमता का विकास करने की प्राथमिक सीढ़ी का प्रथम पहिया है

January 13, 2023

शिक्षा मानव बौद्धिक क्षमता का विकास करने की प्राथमिक सीढ़ी का प्रथम पहिया है शिक्षा और ज्ञान न्यायपूर्ण और प्रगतिशील

कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर

January 12, 2023

कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर जोशीमठ की स्थिति यह एक बहुत ही गंभीर चेतावनी है कि लोग पर्यावरण के

बस तुम हो, इससे विशेष जीवन में और क्या हो सकता है

January 11, 2023

बस तुम हो, इससे विशेष जीवन में और क्या हो सकता है कहते हैं कि मीठा झगड़ा तो हर कपल

स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग

January 9, 2023

स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर

आओ कुदरती संसाधनों से छेड़छाड़ रोकने का संकल्प करें

January 9, 2023

 आओ कुदरती संसाधनों से छेड़छाड़ रोकने का संकल्प करें  जोशीमठ के अस्तित्व पर संकट – कुदरत की कराई या फ़िर

सैनिक सेवा की अनिवार्यता का समय

January 8, 2023

सैनिक सेवा की अनिवार्यता का समय अब समय आ गया है कि सरकारी कर्मचारियों और 12 लाख से ऊपर की

PreviousNext

Leave a Comment