Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

Safal kaise bane| सफल कैसे बनें?

आओ सफ़ल शख्सियत बनें जीवन में सफ़ल शख्सियत बनने के लिए धैर्य, दृड़ता सहिष्णुता, अनुशासन के गुणों को अपनाने की …


आओ सफ़ल शख्सियत बनें

जीवन में सफ़ल शख्सियत बनने के लिए धैर्य, दृड़ता सहिष्णुता, अनुशासन के गुणों को अपनाने की ज़रूरत

जीवन में रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठकर मानवीय गुणों को अपनाने की ज़रूरत – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वर्तमान नए और विकसित ज़माने, डिजिटल युग में करीब-करीब हर व्यक्ति की यह चाहत है कि वह एक सफ़ल शख्सियत बने, उसके पास नाम, पैसा, शोहरत हो जिसके लिए वह राजनीतिक, सरकारी, निजी या विदेशी क्षेत्रों में अपना विस्तृत शाही भविष्य बनाने के लिए विकल्प ढूंढने के लिए तीव्रता से अग्रसर हैं। परंतु यह बात रेखांकित करने योग्य है कि हमें जीवन में सफ़ल शख्सियत बनने के लिए सबसे पहले धैर्य सहिष्णुता, दृड़ता, अनुशासन जैसे सशक्त मानवीय गुणों रूपी भट्टी से तप कर निकलने की ज़रूरत है। जीवन में रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठकर उन मानवीय गुणों को अपनाने की ज़रूरत है जिसके बल पर हम अपने आप को पाएंगे कि लोगों के बीच वाकई में हम सफ़ल शख्सियत हैं।
साथियों बात अगर हम सहिष्णुता और असहिष्णुता की करें तो इसकी विस्तृत जानकारी इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि अभी भी ऐसे युवाओं की संख्या अधिक है जिन्होंने इन शब्दों को तो सुना है पर इसका अर्थ शायद गहराई से नहीं जानते होंगे मैंने यह शब्द मुख्य रूप से सन 2015 में सुना था जब एक के बाद एक अवार्ड वापसी का मामला पुरजोर तरीके से जोरों पर भारत में गूंजा था जब एक के बाद एक लगभग 40 लेखकों ने अपने साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटा दिए तथा सात-आठ ने अकादेमी की समितियों की सदस्यता से इस्तीफे दे दिए थे। यह प्रकरण लगभग तीन-चार महीने चलता रहा। देश-भर के अखबार, रेडियो और टी.वी. चैनल इसे प्रमुखता से छापते और प्रसारित करते रहे। फेसबुक और सोशल मीडिया पर निरंतर मत-मतांतर लिखे और पढ़े जाते रहे थें।
साथियों बात अगर हम सहिष्णुता के अर्थ की करें तो यह एक सहनशीलता, एडजस्टमेंट के तुल्य है यह एक भावनात्मक शक्ति है। भाव इन्द्रिय चेतना और मन से परे होता है। मन भाव से संचालित होता है और इन्द्रियां भी भाव से संचालित होती है। भाव सबसे ऊपर है। जो व्यक्ति सहिष्णुता का विकास करना चाहे उसे अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। जब सहन करने की शक्ति कम लगे तो सोचना चाहिए कि कहीं मेरे शरीर के अवयवों में कोई विकृति तो नहीं हुई है, कोई दोष तो नहीं आया है ?
सहनशीलता एक सांस्कृतिक गुण है ना कि प्राकृतिक गुण और इसी लिए मनुष्य ही सहनशीलता के लिए सबसे उपयुक्त है और इसी कारण आज से चार हज़ार वर्ष पूर्व जब मनुष्य ने एक व्यवस्थित जीवन जीना शुरू किया तो ऐसा लगा मानो मनुष्य ने सहिष्णुता को स्वीकार कर लिया है पर समय के साथ संस्कृति के भी प्रभाव की न्यूनता मानव के जीवन में दिखाई देने लगी और जिस मनुष्य ने विवाह , परिवार का निर्माण किया वही एक सीमा के बाद असहिष्णुता के प्राकृतिक गुण को प्रदर्शित करने लगा।
साथियों बात अगर हम दृड़ता, अनुशासन और धैर्य की करें तो मेरा मानना है कि करीब करीब युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका अर्थ, परिभाषा प्रैक्टिकली जानते होंगे, क्योंकि यह तीनों ऐसे मानवीय गुण है जिनका कहीं ना कहीं हर व्यक्ति को पालन करना ही होता है, जो नहीं करते उनके जीवन में कष्टों का आना शुरू हो जाता है, याने हम कह सकते हैं कि यह तीनों गुण दुखो, कष्टों के सामने एक रोड़ा है, जो उन्हें रोक कर रखते है और इस बीच हम अपने जीवन को सफ़ल शख्सियत की पहचान बनाने में कामयाब हो जाते हैं।
साथियों अगर हम विपत्तियों को धैर्य में से नहीं काटेंगे, संकल्पों को दृढ़ता से नहीं पूर्ण करेंगे और इन दोनों कार्यों को अनुशासन की कड़ी में रहकर करेंगे तो सफलता हमारे कदम चूमेगी, क्योंकि बड़े बुजुर्गों का कहना है कि मानवीय गुणों, पर्याप्त कुशलता और सफ़ल शख्सियत बनने का ज़ज्बा और जांबाज़ी हो तो सफ़लता के पास तुम्हें नहीं जाना पड़ेगा सफलता ख़ुद आकर तुम्हारे कदम चूमेगी, हम अगर हमारे बड़े बुजुर्गों, हमारी पूर्व पुरानी पीढ़ियों द्वारा फरमाए एक एक कहावत पर अगर हम चले तो यह जीवन हमें बहुत खूबसूरत, उपयोगी और सफ़ल लगने लगेगा।
साथियों बात अगर हम माननीय पूर्व उपराष्ट्रपति द्वारा एक कार्यक्रम में छात्रों के साथ बातचीत की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी कहा, आज युवाओं से अपने चुने हुए क्षेत्रों में सफ़ल शख्सियत बनने के लिए सहिष्णुता, धैर्य, अनुशासन, कड़ी मेहनत, अध्ययन और सहानुभूति के गुणों को अपनाने का अनुरोध किया है। उन्होंने इसका उल्लेख किया कि अगर कोई असहिष्णु है तो वह नेता नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि एक नेता को लोगों के जनादेश को लेकर सहिष्णु होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एक नेता में योग्यता, क्षमता, अच्छा आचरण और चरित्र होना चाहिए। उन्होंने इस बातचीत में छात्रों को जीवन के बारे में रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने आगे कहा, आपको हमेशा जाति, धर्म और क्षेत्र जैसे संकीर्ण विचारों से ऊपर उठना चाहिए और कभी भी अन्य धर्मों का अनादर नहीं करना चाहिए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ सफ़ल शख्सियत बनें, जीवन में सफ़ल शख्सियत बनने के लिए धैर्य, दृड़ता, सहिष्णुता, अनुशासन के गुणों को अपनाने की ज़रूरत है। जीवन में रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठकर मानवीय गुणों को अपनाने की ज़रूरत है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई

December 17, 2022

व्यंग्य कविता–योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई सुशासन समागम में सीएम ने यह बात बिना हिचक के

सुख–दुख पर कविता

December 15, 2022

कविता–जिंदगी सुखों और दुखों का ख़ूबसूरत मेल है जिंदगी में उतार-चढ़ाव बस एक ख़ूबसूरत खेल है जिंदगी सुखों और दुखों

नाथु ला दर्रा से तवांग तक वाइब्रेंट बॉर्डर योज़ना से बौखलाया विस्तारवादी देश

December 15, 2022

नाथु ला दर्रा से तवांग तक वाइब्रेंट बॉर्डर योज़ना से बौखलाया विस्तारवादी देश भारत सरकार बॉर्डर एरियाओं में लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote

December 14, 2022

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote जब कभी रिशतों के दरमियान विश्वास टूट जाता हैवो रिश्ता , रिश्ता नहीं

अंतर्मन को संवारते जा। Antarman ko sanwarte ja

December 14, 2022

अंतर्मन को संवारते जा। जाने वाले को बार-बार रोका नहीं करते,अकेले जीने से डरा नहीं करते,टूट गया जो बर्तन टूटना

मेला तोना , मेला बाबू | kavita- mela tona, mela babu

December 12, 2022

मेला तोना , मेला बाबू देखो-देखो ये क्या हो रहा हैमेला तोना , मेला बाबू तलन(चलन)में युवा खो रहा है।।मेला

PreviousNext

Leave a Comment