Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sach pagli hme tumhi se pyar hai

 कविता जब देखता हूं जिधर  देखता हूं  दिख  जाती  हो मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती …


 कविता


sach pagli hme tumhi se pyar hai


जब देखता हूं जिधर  देखता हूं  दिख  जाती  हो

मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती हो

दिन के उजालों में रात के अंधेरों में दिख जाती हो

जिस दर्पण को देखू  उस दर्पण में दिख जाती हो

सुबह शाम जागते सोते खेलते खाते दिख जाती हो

गली मोहल्ले  घाट     नदियों  पर   दिख   जाती   हो

यह दिल  ये सी.पी ये  शायर तुम   पर    निसार  है

सच   पगली    हमें      तुम्हीं          से     प्यार  है

सच     पगली   हमें     तुम्हीं       से        प्यार    है

                                    कवि सी.पी गौतम


In hinglish

jab dekhta hu jidhar  dekhta hu dikh jati ho

mote mote kitabon ke kale kale  shabdo me dikh jati ho 

din ke ujalon me rat ke andhero me dikh jati ho 

jis darpan ko dekhoo us darpan me dikh jati ho 

subah sham jagte sote khelte khate dikh jati ho 

gali mohalle ghat nadiyo par dikh jati ho 

yah dil ye  c.p. ye shayar tum par nisaar hai 

sach pagli hme tumhi se pyar hai

sach pagli hme tumhi se pyar hai

                                     kavi c.p. gautam


Related Posts

नगाड़े सत्य के बजे |Nagade satya ke baje

December 11, 2022

 नगाड़े सत्य के बजे बजे झूठ पर तालियां,केवल दिन दो-चार।आखिर होना सत्य ही,सब की जुबां सवार।। सब की जुबां सवार,दौड़ता

मत करिये उपहास | mat kariye uphas

December 10, 2022

मत करिये उपहास अपना बोया ही मिले,या कांटें या घास।बे-मतलब ना बोलिये,मत करिये उपहास। मत करिये उपहास,किसी का जान-बूझकर।निकले हर

भ्रष्टाचार की पोल खोलते रहेंगे| bhrastachar ki pol kholte rahenge

December 10, 2022

 यह  व्यंग्यात्मक कविता वर्तमान में असफ़ल हुए उम्मीदवारों और पार्टी के भाव कविता के माध्यम से प्रस्तुत है। व्यंग्य कविता–भ्रष्टाचार

भारत माँ की पीर| bharat ma ki peer

December 10, 2022

भारत माँ की पीर भारत के गणतंत्र की,ये कैसी है शान ।भूखे को रोटी नहीं,बेघर को पहचान ।। सब धर्मों

Kavita–फितूर| Fitoor

December 10, 2022

कविता : फितूर सुना है बड़े मशहूर हो गए हो,क्या इसलिए इतनी दूर हो गए हो ! हर बात चुभती

अवैध रिश्ते| Awaidh rishte

December 10, 2022

अवैध रिश्ते रिश्तों के दरमियानकुछ दगाबाज पलते जो अपनों को ही अंधेरे में रख हर वक्त छलते।। अवैध रिश्ते कहां

PreviousNext

Leave a Comment