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Sach pagli hme tumhi se pyar hai

 कविता जब देखता हूं जिधर  देखता हूं  दिख  जाती  हो मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती …


 कविता


sach pagli hme tumhi se pyar hai


जब देखता हूं जिधर  देखता हूं  दिख  जाती  हो

मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती हो

दिन के उजालों में रात के अंधेरों में दिख जाती हो

जिस दर्पण को देखू  उस दर्पण में दिख जाती हो

सुबह शाम जागते सोते खेलते खाते दिख जाती हो

गली मोहल्ले  घाट     नदियों  पर   दिख   जाती   हो

यह दिल  ये सी.पी ये  शायर तुम   पर    निसार  है

सच   पगली    हमें      तुम्हीं          से     प्यार  है

सच     पगली   हमें     तुम्हीं       से        प्यार    है

                                    कवि सी.पी गौतम


In hinglish

jab dekhta hu jidhar  dekhta hu dikh jati ho

mote mote kitabon ke kale kale  shabdo me dikh jati ho 

din ke ujalon me rat ke andhero me dikh jati ho 

jis darpan ko dekhoo us darpan me dikh jati ho 

subah sham jagte sote khelte khate dikh jati ho 

gali mohalle ghat nadiyo par dikh jati ho 

yah dil ye  c.p. ye shayar tum par nisaar hai 

sach pagli hme tumhi se pyar hai

sach pagli hme tumhi se pyar hai

                                     kavi c.p. gautam


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