Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Sabke apne Gandhi by Jitendra Kabir

 सबके अपने गांधी गांधी, तुम किसके हो? उनके हो, जो तुम्हारे नाम पर बड़ी-बड़ी  योजनाएं चलाते हैं, दिखावे के लिए। …


 सबके अपने गांधी

Sabke apne Gandhi by Jitendra Kabir

गांधी, तुम किसके हो?

उनके हो,

जो तुम्हारे नाम पर बड़ी-बड़ी 

योजनाएं चलाते हैं,

दिखावे के लिए।

तुम्हारी बदनामी भी

सबसे ज्यादा वही करवाते हैं,

मीडिया में झूठी कहानियां फैलाकर,

तेरे हत्यारे का महिमा मंडन करके,

तेरे दर्शन की हत्या करके,

जिनकी विचारधारा में ही तुम्हारे

सिद्धांतों से खिलाफत है,

वो ही तुम्हें मुखौटा बनाए

बैठे हैं,

जानते हो क्यों ?

क्योंकि उनके लिए

” मजबूरी का नाम महात्मा गांधी है “

उन्होंने जो गढ़कर हीरो बनाए हैं अपने

जानता कौन है उन्हें देश से बाहर,

अब हर जगह तो मीडिया बिकाऊ नहीं 

इसलिए उन्हें कोई जानता नहीं।

या फिर उनके हो?

जो अवसर देख ओढ़ लेते हैं

तुम्हारे सिद्धांतो का चोला,

मगर मतलब निकलते ही

आ जाते हैं अपने रंग में

वस्तुत: तुम हम सबके हो

अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से

हम कर लेते हैं तुम्हारा इस्तेमाल,

इतने व्यापक प्रभाव वाली शख्सियत

हमारे पास दूसरी नहीं।

                             जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कैसे कोई गीत सुनाये-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

कैसे कोई गीत सुनाये कितने साथी छूट गएसब रिश्ते नाते टूट गएपल-पल मरती आशाएंजब अपने ही लगें परायेकैसे कोई गीत

प्रणय जीवन- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

प्रणय जीवन प्रेम जीवन में प्रवाहित,प्रेम से जीवन जुड़ा है,प्रेम का परिणाम हम हैं,प्रेम को जीवन समर्पित ।। जिंदगी पर्याय

जीने का अनुराग नहीं – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

जीने का अनुराग नहीं प्यासी है नदियां प्यासा है सावन,बर्षा की बेला प्यासा है चातक ,प्यासी है धरती प्यासा है

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

Leave a Comment