Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Roya Kabira samajh n paye by H.K. Mishra

 रोया कबीरा समझ न पाए रोया कबीरा दीन दुखियों पर, गाया कबीरा मोहताजों पर , संदेश दिया साखी पढ़ कर …


 रोया कबीरा समझ न पाए

Roya Kabira samajh n paye by H.K. Mishra

रोया कबीरा दीन दुखियों पर,

गाया कबीरा मोहताजों पर ,

संदेश दिया साखी पढ़ कर ,

तीखा बोला पाखंडों पर   ।।

हम समझ न पाए कबीरा को,

निराकार जो उनका अपना ,

दर्शन उनका जीवन मेरा ,

तत्व बताया बड़े ज्ञान का   ।।

रहस्यवाद पर कबीरा का ,

अनुभव उनका अपना था,

हम पाखंडी बने रहे , पर,

पढ़ा नहीं कभी-कबीरा को  ।।

ज्ञानी ध्यानी को जाने पर ,

नींद हमारी  खुलती है ,

हो जाती जब देर बहुत ,

हम उस पर पछताते हैं  ।।

कह गए कबीर सुनो साधु,

दुनिया नहीं ठौर ठिकाना है,

बार-बार कहता आया हूं ,

जीवन पानी का बुलबुला  ।।

वसुंधरा हरी भरी,

मरुधरा कैसे बनी,?

प्रयास तेरे पास है ,

चुनौती स्वीकार कर ।।

कबीर और रैदास को ,

एक साथ  झांक तू  ,

ज्ञान का भंडार जो,

परवाह किसको आज है ?

दिशा और दशा से ,

बहुत दूर आज हैं ,

साफ-साफ दिख रहा,

अंधकार मेरे पास है  ।।

रोया कबीरा समझ न पाए,

गंगा तट पर क्यों पछताए ,

उनका दर्शन उनका जीवन,

आओ मिलकर हम अपनाएं। ।।

गुरु भाई दोनों मिले ,

संत कबीर रैदास ,

मां गंगा प्रसन्न हुई,

अपने तट पर आप। ।।

गूंज उठा गंगा तट एक पल,

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी ,

भक्तों में थी होड़ लगी ,

भजन करे रैदासा ,,,,,

                       “

                      ” प्रभु जी तुम चंदन हम पानी”

मौलिक रचना

                   डॉ हरे कृष्ण मिश्र

                   बोकारो स्टील सिटी

                   झारखंड ।


Related Posts

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

कोशिश-नंदिनी लहेजा

January 6, 2022

विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और

Leave a Comment