Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Rotiya by vijay Lakshmi Pandey

 रोटियाँ…!!! हमनें    पूरे   जीवन    में  कुल  दस  रोटियाँ  बनाईं पहली माँ के लोइयों को थपथपाई खुशियाँ   मनाई   नाची …


 रोटियाँ…!!!

Rotiya by vijay Lakshmi Pandey

हमनें    पूरे   जीवन    में 

कुल  दस  रोटियाँ  बनाईं

पहली माँ के लोइयों को थपथपाई

खुशियाँ   मनाई   नाची गाई…!!!

हमनें   पूरे     जीवन   में 

कुल  दस  रोटियाँ बनाईं

दूसरी बीती  दीवाली  की 

सुबह मिट्टी के दिए में सजाई..!!!

हमनें    पूरे   जीवन    में 

कुल  दस   रोटियाँ बनाई

तीसरी माँ से छुपकर बनाई

उसे  चींटियों को  खिलाई..!!!

हमनें  पूरे    जीवन   में

कुल दस  रोटियाँ बनाई

चौथी सखियों के घर बनाई

भोग प्रभु  को  लगाई…!!!

हमनें    पूरे    जीवन  में 

कुल दस रोटियाँ  बनाई

पाँचवी सीखनें के तौर पर बनाई

उसे   माँ  को    खिलाई..!!!!

हमनें    पूरे   जीवन    में 

कुल  दस   रोटियाँ बनाई

छठवीं पाठशाला में बनाई 

गुरुजन वृन्द को  खिलाई..!!!

हमनें    पूरे    जीवन  में

कुल   दस रोटियाँ बनाई

सातवीं बड़े प्रेम से बनाई

उसे    पति   को  खिलाई…!!!

हमनें    पूरे   जीवन    में

कुल दस   रोटियाँ बनाई

आठवीं उत्साह से बनाई

रिश्तेदारों  को    खिलाई..!!!

हमनें   पूरे    जीवन  में

कुल  दस रोटियाँ बनाई

नवीं वात्सल्य से बनाई

उसे   बेटे  को  खिलाई…!!!

हमनें  पूरे   जीवन   में

कुल दस रोटियाँ बनाई

और आखिरी दसवीं रोटी

मजबूरी में खुद के लिए बनाई,क्या खाई…??

इस “विजय” नें पूरे जीवन में 

कुल  दस    रोटियाँ     बनाई 

खुद के लिए बनाई ,खाई न खिलाई

बीती रोटियों को गिन कर मुस्कुराई..!!!✍️

                   विजय लक्ष्मी पाण्डेय
                   एम. ए., बी.एड(हिन्दी)
                   स्वरचित मौलिक रचना
                         आजमगढ़, उत्तर प्रदेश


Related Posts

सुख–दुख पर कविता

December 15, 2022

कविता–जिंदगी सुखों और दुखों का ख़ूबसूरत मेल है जिंदगी में उतार-चढ़ाव बस एक ख़ूबसूरत खेल है जिंदगी सुखों और दुखों

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote

December 14, 2022

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote जब कभी रिशतों के दरमियान विश्वास टूट जाता हैवो रिश्ता , रिश्ता नहीं

अंतर्मन को संवारते जा। Antarman ko sanwarte ja

December 14, 2022

अंतर्मन को संवारते जा। जाने वाले को बार-बार रोका नहीं करते,अकेले जीने से डरा नहीं करते,टूट गया जो बर्तन टूटना

मेला तोना , मेला बाबू | kavita- mela tona, mela babu

December 12, 2022

मेला तोना , मेला बाबू देखो-देखो ये क्या हो रहा हैमेला तोना , मेला बाबू तलन(चलन)में युवा खो रहा है।।मेला

व्यंग्य कविता -मासिक शासकीय पगार चौदह हज़ार है

December 12, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार की हदें पार है?क्योंकि मेरा वेतन केवल चौदह हज़ार है।पर एक महीनें में मेरा खर्चा लाखों

शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं | shaskeeye thappe wali vastuon ki heraferi karta hun

December 11, 2022

यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु

PreviousNext

Leave a Comment