Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Raunak laut aae by Anita Sharma

 रौनक लौट आई लम्बे अरसे के बाद सही पर……रौनक लौट रही। सज रहे बाजार  बहुत समय के बाद । घरों …


 रौनक लौट आई

Raunak laut aae by Anita Sharma

लम्बे अरसे के बाद सही

पर……रौनक लौट रही।

सज रहे बाजार 

बहुत समय के बाद ।

घरों में भी चहचहाट है

रंगों संग खुशहाली है ।

गलियों में सरगर्मी लौटी

दीपावली की रौनक लौटी।

सारा डर पीछे छूटा है

चेहरों पर संतोष दिखा है।

नये वस्त्र-सज-धज का सामान

निकल रहे बाजार सभी।

अर्से बाद फिर रौनक लौटी 

उत्सव के रंग दिखते सब ओर।

घरों में रंग रौगन हुआ

बस सन्नाटा दूर हुआ।

बरसों बाद रौनक लौटी

सबके चेहरे पर मुस्कान दिखी।

खुलकर अब जीवन लौटा

सरपट दौड़ बढ़ रही जिन्दगी।

घर बाजार स्कूल खुले

चारो ओर रौनक बिखरी।

—-अनिता शर्मा झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

आने वाला पल- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

आने वाला पल आने वाला पल तो आकर ही रहेगा, जैसे जाने वाला पल भीभला कब ठहरा है ? क्योंकि

गुरु गोविंद पुकारा है – डॉ इंदु कुमारी

January 13, 2022

गुरु गोविंद पुकारा है तेग बहादुर सिंह ने अपने बेटे को बलिदान दिया झुका नहीं दुश्मन के आगेमौत को भी

व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 13, 2022

व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

January 13, 2022

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

Leave a Comment