Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Rakhi ka tyohar by indu kumari

 राखी का त्योहार राखी का त्योहार हम मनाएं रे उमंग भरी है मन में मिलकर गाएं रे बचपन की तकरार …


 राखी का त्योहार

Rakhi ka tyohar by indu kumari

राखी का त्योहार हम मनाएं रे

उमंग भरी है मन में मिलकर गाएं रे

बचपन की तकरार होठों पे आई रे

कर -करके याद मन मुस्काई   है

रक्षाबंधन जब-जबआते सावन में

भाई का प्यार उमड़ते मन के आंगन में

उन लम्हों की यादें ताजा कर ले रे

प्यार से उन बातों को साझा कर लें रे

राखी का त्योहार हम मनाएं रे

उमंग भरी है मन में मिलकर गाएं रे

भाई-बहन का प्यार अति ही पावन है

सावन की हरियाली सी मनभावन है

सजी दूकानें रेशम के इन धागों से

खुशियां मिल रही है पूछो बहारों से

आओ बहना मिलकर दीप जलाएं रे

राखी का त्योहार हम मनाएं रे

भाई-बहन के स्नेह का ये त्योहार है

भाई के कलाई का अद्भूत श्रींगार है

अक्षत कुमकुम,श्रीफल से थाल सजाएं रे

राखी का त्योहार हम मनाएं रे ।

          स्व रचित

डॉ.इन्दु कुमारी

              हिन्दी विभाग 

मधेपुरा बिहार


Related Posts

धारा के विपरीत

June 24, 2022

 धारा के विपरीत जितेन्द्र ‘कबीर’ शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी

अस्तित्व इतिहास बनेगी

June 24, 2022

 अस्तित्व इतिहास बनेगी सुधीर श्रीवास्तव पृथ्वी दिवस की औपचारिकता न निभाइए भू संरक्षण करना है तो  धरातल पर कुछ करके

यही जीवन चक्र है

June 24, 2022

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन

व्यंग्य धरती को मरने दो

June 24, 2022

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत

जब तक है जिंदगी

June 24, 2022

 जब तक है जिंदगी सुधीर श्रीवास्तव जिंदगी जब तक है गतिमान रहती है, न ठहरती है,न विश्राम करती है। सुख

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

PreviousNext

Leave a Comment