Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Pyar tumse bahut chahti thi by antima singh

 शीर्षक- प्यार तुमसे बहुत चाहती थी। प्यार तुमसे तुम्हारा बहुत चाहती थी, बोलो ना..ये क्या मैं गलत चाहती थी……..? माना, खूबसूरत …


 शीर्षक- 
प्यार तुमसे बहुत चाहती थी।

Pyar tumse bahut chahti thi by antima singh

प्यार तुमसे तुम्हारा बहुत चाहती थी,

बोलो ना..ये क्या मैं गलत चाहती थी……..?

माना, खूबसूरत नहीं अप्सरा की सी मैं,

पर बिछायी थी दिल ये धरा की सी मैं,

ना कनक धन और ना मैंने चाहा रजत,

अपने ज़ज्बातों की बस इज्जत चाहती थी।

बोलो ना… ये क्या मैं गलत चाहती थी……..?

मैंने हरदम पुकारा तु्म्हें प्यार से,

साथ देते तो लड़ जाती संसार से,

तुम तो रिश्ते का मतलब न जाने कभी,

अपने रिश्ते को देना मैं संबल चाहती थी,

बोलो ना… कि क्या मैं गलत चाहती थी…….?

बहुत खूब चलता ये रिश्ता हमारा,

सजन मेरे ग़र तुम भी देते सहारा,

दो दिन प्रीत का स्वांग करके क्युं छोड़ा,

मैं तुमसे जो थोड़ी कुव्वत चाहती थी,

बोलो ना….ये कैसे गलत चाहती थी……..?

तुमने अपनी प्रिया को है माना बहुत,

मेरा दिल यूं दगा कर दुखाया बहुत,

स्नेह धागे से बंध करके मैं तो सदा,

पूरे करने वो सातो बचन चाहती थी।

बोलो ना….ये क्या मैं गलत चाहती थी………..?

           अंतिमा सिंह,”गोरखपुरी   (स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित रचना)

25/07/2021


Related Posts

नया बदलाव लाए!

April 27, 2022

 नया बदलाव लाए! सिर्फ शोर ना मचाए, चलो नया बदलाव लाए, इस बेशकीमती जीवन में, कुछ कमाल करके दिखाएं! बदलाव

क्रोध, कायरता की निशानी!

April 27, 2022

क्रोध, कायरता की निशानी! क्रोध एक श्राप है,इसमें पतन का वास है,क्रोध पर हो पूर्ण रूप से वश,शीतलता और प्रेम

हमारी आत्मकथा!

April 27, 2022

हमारी आत्मकथा! लिखें हमारे जीवन की कहानी,साहस,दृढ़ता हो इसकी निशानी,कलम से नहीं कर्म से लिखें,हमारा जीवनी भी प्रेरणादायक दिखे! इस

स्वाभिमान!

April 27, 2022

स्वाभिमान! सम्मान मांगो ना, कमाओ,पैसे मांगो ना, कमाओ,और कमाना कैसे हैं, इस गौरवशाली जीवन में,सीखो और सिखाओ! खुद के हक

पर्यावरण का संरक्षण!

April 27, 2022

पर्यावरण का संरक्षण! अद्भुत सी सुंदरता है पर्यावरण में,चलो हम भी लाए, कुछ जिम्मेदारियां हमारे आचरण में,क्यों फैला रखा है

हुनर को पहचाने!

April 27, 2022

हुनर को पहचाने! हुनर को पहचानिए,अपनी कला को जानिए,मछली की योग्यता है तैरना,उसे उड़ने के लिए ना मनाइए! कौशल का

PreviousNext

Leave a Comment