Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Putle palatwar nhi karte by Jitendra Kabir

पुतले पलटवार नहीं करते बुराई का पुतला बना, उसको जलाकर, अपने झूठे अहम की तुष्टि कर लेना आसान है, इसलिए …


पुतले पलटवार नहीं करते

Putle palatwar nhi karte by Jitendra Kabir
बुराई का पुतला बना,

उसको जलाकर,

अपने झूठे अहम की

तुष्टि कर लेना आसान है,

इसलिए यह रस्म सदियों से

निभाते आए हो,

जानते हो!

मुश्किल क्या है?

अपने सामने फल-फूल रहे

जिंदा रावणों का दहन करना,

अन्याय के प्रतिकार के लिए

डटकर खड़े हो जाना,

अत्याचारी का ऐसा हश्र करना

कि किसी की सोच में भी नीच

कृत्य न आए,

और वो शायद तुमसे होगा नहीं,

क्योंकि मैंने देखा है तुम्हें

झूठे और पाखंडियों के चरणों में

गिरते हुए,

मैंने देखा है तुम्हें

भीड़ की शक्ल में अकेले निहत्थे

इंसान की हत्या करते हुए,

मैंने देखा है तुम्हें

बलात्कारियों और व्यभिचारियों

के समर्थन में रैलियां निकालते हुए,

अपराध को देख कर भी

अनदेखा करके,

अत्याचार को अपना नसीब मानकर,

अपने निजी स्वार्थ के खातिर

आततायी का समर्थन करते करते

तुम भी पुतले बन चुके हो

और पुतले तो जलते ही हैं

वो कभी प्रतिकार नहीं करते,

वो कभी पलटवार नहीं करते,

वो सब कुछ बर्दाश्त करते जाते हैं

क्योंकि वो मुर्दा होते हैं,

जिंदा लोगों की तरह वो अपने

हक के लिए यलगार नहीं करते।

                           जितेन्द्र ‘कबीर’
                           
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 701855831



Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment