Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Purana waqt laut aaye to achha hai by Jitendra Kabir

 पुराना वक्त लौट आएतो अच्छा है लगभग दो वर्षों बाद सुनसान पड़े गलियारों और इमारतों में अब जाकर कहीं उनके …


 पुराना वक्त लौट आए
तो अच्छा है

Purana waqt laut aaye to achha hai by Jitendra Kabir

लगभग दो वर्षों बाद

सुनसान पड़े गलियारों

और इमारतों में

अब जाकर कहीं उनके बाशिंदे 

चहचहाने लगे हैं,

लगभग दो वर्षों बाद

बे-आवाज, निर्जीव से पड़े

स्कूल के डेस्क अब जाकर कहीं

खटखटाने लगे हैं,

लगभग दो वर्षों बाद

बच्चे फिर से सुबह जल्दी उठकर

स्कूल जाने की कवायद

अपनाने लगे हैं,

लगभग दो वर्षों बाद

बच्चों की आंखें, दिमाग और

आदतें खराब करने वाली

इस ऑनलाइन पढ़ाई के दिन

जाने लगे हैं,

अब यह कोरोना भी 

इस देश से चला जाए तो अच्छा है,

लोगों का सामान्य जनजीवन

पटरी पर आ जाए तो अच्छा है,

सबसे मिलकर मौज मनाने का

पुराना वक्त लौट आए तो अच्छा है।

जितेन्द्र ‘कबीर’                   
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

अच्छे के लिए होता है !

March 26, 2022

अच्छे के लिए होता है ! राजा और मंत्री शिकार के लिए निकले, जंगल में आए, बहुत सारी झाड़ी और

दयावान बने!

March 26, 2022

दयावान बने! सोए हुए शेर के ऊपर चढ़ा चूहा,शेर उठा और हुआ आग बबूला,गुस्से में कहा, तुम्हें कौन बचाएगा,यह खूंखार

अजय प्रसाद की रचनाएं

March 26, 2022

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों

मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी

March 26, 2022

मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी

हौंसले-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी

जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से

PreviousNext

Leave a Comment