Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Priye ke desh by Indu kumari

 प्रिय के देश तुम भी  उनके  हो प्रिय, मैं  भी उनकी  प्रियतमा। जिसे ढूँढती  है अन्तर्मन, पूजती  है   सारा   जहाँ …


 प्रिय के देश

Priye ke desh by Indu kumari

तुम भी  उनके  हो प्रिय,

मैं  भी उनकी  प्रियतमा।

जिसे ढूँढती  है अन्तर्मन,

पूजती  है   सारा   जहाँ

 जिस प्रिय के हो आशिक

उनसे आशिकी  है  मेरी

शिद्दतों से बिछुड़े है हम

कायनात भी करती यादें

दर-दर  करती फरियादें

खोजती है कई रूपों में

अळख  हमारे है अन्दर

बस राह भटक गये  हैं

खाक छाना करते  हम

वो मिलते हैं प्रेम वन में

सूरत की नाव बनाकर,

प्रिय  के  देश चलें हम।

         डॉ.इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

Gazal huwa ghatak corona by brijesh sinha

June 3, 2021

ग़ज़ल  -हुआ घातक करोना, हुआ घातक करोना,यार कब इसको हरायेंगे, | अगर अब भी नहीं सतर्क होये, मारे जाएँगे ||1

kavita zindagi by deepika biswal

June 3, 2021

 जिंदगी जिदंगी को अजीब कहा जाए या किस्मत को अजीब कहा जाए? लोगो से एक बात बार – बार सुनी

kavita mujhse aa kar ke mil raha koi

June 3, 2021

कविता -मुझसे आ करके मिल रहा कोई। मुझसे आ करके मिल रहा कोई। ख्वाब आंखों में पल रहा कोई। सूना

kavita meri kismat me kya pta kya by ramesh

June 3, 2021

 मेरी किस्मत में क्या पता क्या मेरी किस्मत में क्या पता क्या फिर भी उनके इरादे भाप लिया चाहत के

मेरा गाँव कविता| mera gaon kavita written by ramdheraj

मेरा गाँव कविता| mera gaon kavita written by ramdheraj

June 3, 2021

यह मेरा गाँव कविता गांव के जीवन को बहुत अच्छी से दिखाती है । तथा गांव में बिताए गए पलों को याद दिलाती है । आज हम शहरो की तरफ भाग आए है लेकिन हमारा बचपन अभी भी उन गांवो में ही कैद है ।

kavita do kandhe mil jate hai by chanchal krishnavanshi

June 3, 2021

कविता -दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे, रोने के बादमानता

Leave a Comment